जल ही जीवन है। ये बात तो आप सभी मानते होंगे। लेकिन जब जल ही ना रहे तो फिर इंसान क्या करे। वैज्ञानिकों की माने तो आने वाले 10 सालों में दुनिया, साफ़ पानी की किल्लत से गुज़रेगी। लोगों को पीने का पानी तक ख़रीद कर पीना पड़ेगा। ये एक ऐसा वक़्त होगा जब लोग गाड़ी, पैसे, जेवरात छोड़ पानी की चोरी किया करेंगे। आज भी कई ऐसे देश और प्रांत हैं, जहां के लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। यहां पर लोगों को पानी के लिए लम्बी दूरी तय करनी पड़ती है। इन देशों में UAE हमेशा ही पहले पायदान पर मिलता है। लेकिन UAE ने पानी की किल्लत से छुटकारा पाने का एक एक अनोखा तरीका खोज निकाला है।

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UAE Flag Hosting

जीहां, दरअसल UAE ने अपने देश में पानी की किल्लत को दूर करने के लिए 12 हजार किलोमीटर दूर अंटार्कटिका से आइसबर्ग लाने की योजना बनाई है। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत साल 2019 में होगी। आइसबर्ग को अंटार्कटिका से UAE के फुजैराह तट तक लाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट की पूरी जिम्मेदारी UAE की नेशनल एडवाइजरी ब्यूरो लिमिटेड को सौंपी गई है। नेशनल एडवाइजरी ब्यूरो लिमिटेड के मुताबिक प्रोजेक्ट की लागत 5 से 12 करोड़ डॉलर यानी करीब 343 करोड़ से 824 करोड़ रुपए के बीच आ सकती है। उनके मुताबिक इस आइसबर्ग को लाने में 9 महीने तक लग सकते हैं। अगर प्रोजेक्ट की शुरुआत साल 2019 में की गयी तो साल 2020 तक आइसबर्ग को UAE  की फुजैराह तट तक लाया जा सकेगा।

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UAE Fujairah Map

नेशनल एडवाइजरी ब्यूरो लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अल शेही का कहना है, कि उनके कंपनी ने ऐसी तकनीक विकसित कर ली है, जिससे आइसबर्ग को बिना साफ पानी का नुकसान किए आसानी से UAE  के तट तक लाया जा सकेगा। इसके लिए सबसे पहले सैटेलाइट के जरिए उस आइसबर्ग की पहचान की जाएगी, जिसे अंटार्कटिका से UAE तक लाना है। इसके बाद आइसबर्ग को हाई कैपेसिटी वाले दो जहाजों के जरिए खींचकर गति दी जाएगी। ये दोनों जहाज मिलकर 10 करोड़ टन वजनी आइसबर्ग खींच सकेंगे। एक बार जब आइसबर्ग तट पर आ जाएगा तो उसे काट कर बड़े-बड़े टैंक्स में रखा जाएगा ताकि उससे पिघलकर निकलने वाले साफ पानी का इस्तेमाल हो सके। आइसबर्ग को पहले ऑस्ट्रेलिया या फिर साउथ अफ्रीका के केपटाउन में लाया जाएगा। यहां पर उसकी पिघलने का तापमान देखा जाएगा। उसके बाद UAE के फुजैराह तट तक लाया जाएगा।

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Ship Towing Iceberg

UAE के नेशनल एडवाइजरी ब्यूरो लिमिटेड के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय सामुद्रिक कोड के मुताबिक, पानी के संसाधनों का इस्तेमाल कोई भी कर सकता है। चूंकि बर्फ का पहाड़ भी एक पानी का संसाधन है, इसलिए इसे कहीं भी ले जाया जा सकता है। कंपनी का दावा है कि इससे अंटार्कटिका को कोई नुकसान नहीं होगा।