नई दिल्ली। एससी- एसटी एक्ट के विरोध और गरीब सवर्णों को आरक्षण देन की मांग को लेकर सवर्णों की ओर से किया गया भारत बंद पूरे देश के साथ ही बिहार में भी काफी असरदार रहा। इस भारत बंद का असर इतना था कि रोड से लेकर रेल यातायात तक भी प्रभावित रहा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर कौन है वह चेहरा जिसके कहने पर पूरे बिहार के सवर्ण सड़क पर उतर आए और यह आंदोलन सफल हो गया। आइए बताते हैं हम आपको उस चेहरे के बारे में जिसके कहने मात्र से ही सवर्णों के अंदर का खून खौल गया। आखिर क्या है इसका बिहार कनेक्शन?

आइए हम आपको बताते हैं कि यह सवर्ण सेना क्या है और यह कैसे काम करता है। सवर्ण सेना के अध्यक्ष बिहार के जहानाबाद के रहने वाले भागवत शर्मा हैं। भागवत शर्मा हिंदी विषय से रिसर्च स्कॉलर हैं और अभी अरुणाचल प्रदेश में सेंट्रल यूनिवर्सिटी से रिसर्च कर रहे हैं। भागवत शर्मा ने इस संगठन का निर्माण 2017 में किया था। इस वक्त इस संगठन में 50 हजार से अधिक सदस्य हैं। इस संगठन का इतना जबरदस्त असर रहा कि मात्र दो सालों में भी यह संगठन पूरे देश में फैल गया।

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आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जहां कई संगठनों ने अपने प्रचार-प्रसार के लिए धन और दूसरे अन्य साधनों का इस्तेमाल किया, वहीं इस संगठन के प्रचार-प्रसार में किसी भी प्रकार धन और अन्य साधनों का इस्तेमाल नहीं किया गया। खास बात यह है कि इसके प्रचार-प्रसार के लिए सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया।

भागवत कहते हैं कि उनका संगठन बिहार के साथ-साथ झारखंड और यूपी में भी बहुत तेजी से फैल रहा है। खास बात यह कि इस संगठन से जुड़े लोग अपने इस संगठन के मैसेज को व्हाटसएप और फेसबुक ग्रुप में वायरल कर फैलाते हैं, क्योंकि इस वक्त सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक अपनी बात आसानी से और तेजी के साथ पहुंचाई जा सकती है।

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भागवत शर्मा ने सवर्णों के अधिकार और मांगों पर अपनी बात रखते हुए कहा कि मेरी लड़ाई न तो आरक्षण के विरूद्ध है और न ही एससी-एसटी एक्ट के। मेरी मांग यह है कि बिहार के साथ ही देश के उन सवर्णों को भी आरक्षण का लाभ मिले, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। उन्होंने कहा कि एससी-एसटी एक्ट में सुधार हो ताकि किसी निर्दोष को इसमें ना फंसाया जा सके। भागवत कहते हैं कि मेरी और मेरी सेना की लड़ाई जारी रहेगी।

अब देखना यह है कि भागवत की यह मुहिम कहां तक सफल हो पाती है? क्या बीजेपी सरकार सवर्णों के इस भारत बंद से कोई सबक लेगी? क्या भागवत के इस आंदोलन के बाद सरकार अपनी मंशा बदलेगी? क्या सोचते हैं आप, हमें अपनी राय से नीचे कमेंट बॉक्स में अवगत कराएँ।

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