देश में लोकसभा चुनाव का मौसम है. चारो ओर चुनावी घमासान का डंका बज रहा है. राजनीतिक दल और नेता जनता से बढ चढ़ कर मतदान करने की अपील करते दिख रहे हैं. तो दूसरी ओर चुनाव आयोग भी अलग अलग अभियान चलाकर जनता को मतदान के लिए जागरूक करने की पूरी कोशिश कर रहा है. वहीं देश की जनता भी पूरे जोश के साथ मतदान करने आगे बढ़ रही है. देश में 5 चरणों के चुनाव हो चुके हैं. और बीते 5 चरणो के दौरान आपने मतदाताओं के कई अनोखे किस्से सुने होंगे या देखे होंगे. जहां मतदाताओं के बीच खासा जोश देखने को मिला है

लेकिन आज की हमारी इस खबर में हम चुनाव का कुछ अलग और खास नजारा आपको बताने और दिखाने जा रहे हैं. जहां मतदानकर्मीयों का जोश और हिम्मत सबको हैरान कर देगा.

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जी हां किसी ने कांधे पर ईवीएम-वीवीपैट और बैटरी रखी तो किसी ने ईवीएम के ईद-गिर्द लगने वाले प्लाई के टुकड़े और दस्तावेजों का थैला संभाला और इस तरह मतदान दल ने अपना उपयोगी सामान लादकर चारगांव खुर्द से बड़ागांव तक जंगल का पथरीला चार km लंबा रास्ता तय किया. चीचली जनपद के इस दुर्गम गांव के बूथ नंबर 236 में तलैया, भातौर, पटकना, कुकड़ीपानी टोला, बड़ागांव के 595 में से 414 मतदाताओं ने मतदान कर 68.77 प्रतिशत तक मतदान पहुंचाया.

मतदान कर्मियों ऐसा ही जोश एक और दुर्गम गांव भिलमाढाना में भी देखने को मिला. यहां मतदान 97 प्रतिशत रहा. जहां 474 मतदाताओं में से 464 ने मतदान किया. लेकिन यहां पहुंचने के लिए मतदान कर्मियों के दल को करीब 150 किमी सफर करना पड़ा. ये गांव विकास से अछूता है.और आवागमन जंगल के रास्ते होने से यह गांव हर समय शहर से कटा रहता है और ग्रामीणों को थोड़ी-बहुत सुविधाएं ही हासिल हैं. बावजूद इसके यहां रहने वाले आदिवासी समाज के लोगों में अपने मताधिकार के प्रति खासी जागरूकता है.

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आपको बता दें कि ये किस्सा सिर्फ इन चुनावों का नही है बल्कि हर चुनाव में मतदान कर्मियों को इसी तरह मतदान करवाना पडता है. जिले में बड़ागांव बूथ को सबसे दुर्गम बूथ माना जाता है जहां हर चुनाव में मतदान दल को जंगली रास्ते से पैदल गुजरना पड़ता है. बूथ में तलैया, भातौर, पटकना, कुकड़ीपानी टोला के 305 पुरुष व 290 महिला मतदाता हैं. जहां मतदान कराने बीती 5 मई को मतदान दल को सिर व कांधे पर ईवीएम-वीवीपैट, दस्तावेज, स्याही का थैला लेकर 4 किमी पैदल रास्ता तय कर पहुंचना पड़ा। बूथ में 68 प्रतिशत कराने के बाद जब दल वापस लौटा तो सफर मुश्किल रहा, लेकिन कर्मियों में इस बात का संतोष रहा कि मतदान अच्छा रहा.

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