आध्यात्मिक संत भय्यूजी महाराज उर्फ़ उदय सिंह देशमुख को आज कौन नहीं जानता। मध्य प्रदेश के रहने वाले भैय्यूजी महाराज देश की जानी-मानी हस्ती थे। उनका उठाना बैठना देश के बड़े-बड़े नेताओं-मंत्रियों के साथ था। मर्सडीस कार से चलने वाले और रोलेक्स घड़ियों के शौकीन भैय्यूजी महाराज अपने सामजिक और आध्यात्मिक कार्यों की वजह से महाराष्ट्र और मध्य-प्रदेश में काफी लोकप्रिय थे। उनके सियासी रसूख का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है, कि देश के प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी भी उनके आगे नतमस्तक हुआ करते थे।

भैय्यूजी महराज के सामने नतमस्तक होते माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्रे मोदी

भैय्यूजी महराज ने 12 जून को अपने आश्रम में खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या के बाद पुलिस को वहां उनका सुसाइड नोट भी मिला। पुलिस के मुताबिक आत्महत्या की वजह पारीवारिक कलह बताई गई। बताया जाता है की भय्यूजी महराज की पहली पत्नी का निधन दिल के दौरा पड़ने के वजह से नवंबर 2015 में हो गया था। पहली पत्नी से उन्हें एक लड़की भी है जिसका नाम कुहू देशमुख है। भय्युजी ने 2017 में शिवपुरी की डॉक्टर आयुषी शर्मा से दूसरी शादी कर ली थी। शादी के बाद से ही घर में तनाव का माहौल रहता था। घर में हमेशा कलेश होने की संभावना रहती थी। घर के नौकर से लेकर आश्रम के सेवक तक, कभी भी हो सकने वाले कलेश के वजह से सेहमे रहते थे। कहा जाता है की भय्युजी महाराज की बेटी और उनकी दूसरी पत्नी के बीच रिश्ते कुछ अच्छे नहीं थे।

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Suicide Note

13 जून 2018 को भय्युजी महाराज को अंतिम विदाई दी गई। मुखाग्नि उनकी बेटी कुहू देशनुख ने दी। लेकिन उनकी अंतिम यात्रा में सबसे चौंकानी वाली बात ये थी, कि न तो प्रदेश का कोई बड़ा मंत्री वहां पहुंचा और ना ही किसी अदने से नेता ने उनके क्रियाकर्म में शिरकत की। नेताओं ने ट्विटर पर श्रद्धाजंलि देकर ही चुप्पी साध ली।  यहां तक की विपक्षी पार्टी का भी कोई नेता अंतिम संस्कार में नज़र नहीं आया। हां महाराष्ट्र से गोपीनाथ मुंडे की बेटी ज़रूर पहुंची थीं। 2011 में जनलोकपाल आंदोलन के वक्त कांग्रेस और अन्ना हज़ारे के बीच भय्युजी महाराज ने मीडिएटर का काम किया था और अन्ना हज़ारे का अनशन ख़त्म करवाया था, इतना ही नहीं गुजरात में अनशन पर बैठे मोदी का भी अनशन भय्युजी महाराज ने ही तोड़ा था। राजनीतिक पंडितों और सियासतदानों को उनपर इतना यकीन था, कि उन्हें राजनीतिक संकटमोचक कहा जाता था।

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भैय्यूजी महाराज के साथ अन्ना हज़ारे

सवाल इसलिए उठ रहे हैं, कि इतना रसूख रखने वाले संत को अंतिम वक्त में ये सब लोग कैेस भूल गए? सूत्रों की माने शुरुआती जांच में पुलिस को भय्युजी महाराज के मोबाइल से कुछ ऐसी आपत्तिजनक चीजें मिली हैं, जो उनके जीवन के दोहरेपन की ओर इशारा करती है। अगर इसकी गहरी छान-बीन की जाए तो लोगों के बीच बनी उनकी छवि तार-तार हो सकती है। इसलिए पुलिस ने केस की जांच को आत्महत्या के कारणों पर ही केंद्रित रखा है। इस बात का जिक्र वरिष्ठ पत्रकार और इंडिया न्यूज़ के मैनिजिंग एडीटर राणा यशवंत ने अपने फेसबुक वॉल पर भी किया है।

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Rana Yashwant a senior journalist posted about Bhaiyyuji Maharaj on his Facebook Timeline

राणा यशवंत ने ये भी लिखा है, कि पुलिस की सलाह पर ही सीएम से लेकर मंत्रियों और नेताओं ने अंतिम संस्कार से दूरी बना ली। भय्युजी महाराज की मौत जितनी संदेहास्पद और चौंकाने वाली है, इसमें उतने ही पेंच भी हैं। पुलिस के सामने बड़ी चुनौती है, कि वो इस केस को अंजाम तक पहुंचाकर इस मौत की असल वजह से सामने ला सके।