सरकारी नौकरी का सपना देखने वाले वो लोग जिनका सपना अधूरा रह जाता है और उन्हे प्राइवेट नौकरी में ही सिमट कर रहना पड़ता है. उनके लिए सराकार एक बड़ी खुशखबरी लेकर आई है. जी हां, अब आप भारत सरकार में सीधे संयुक्त सचिव स्‍तर का अधिकारी बन सकते हैं. इसके लिए आईएएस परीक्षा पास करना भी जरूरी नहीं है. और तो और इसके लिए आईपीएस, आईआरएस और इंजीनियरिंग सर्विस से होना भी जरूरी नहीं है. बल्कि एक प्राइवेट पर्सन भी भारत सरकार में सीधे ज्‍वाइंट सेक्रेटरी बन सकता है, जिसे बनने में आईएएस करने वाले युवाओं को भी लगभग 16 साल लग जाते हैं. सुनने में यह अटपटा लग सकता है, लेकिन ये सच है.

इस फैसले के तहत सरकार ने एक झटके में विभिन्‍न क्षेत्रों से आने वाले 9 विशेषज्ञों को लेटरल प्रवेश प्रक्रिया (Lateral Entry Process) के जरिए संयुक्‍त सचिव बनाया है. लेटरल प्रवेश प्रक्रिया के जरिए पहली बार इतनी बड़ी संख्या में अलग-अलग मामलों के विशेषज्ञ सरकार में शामिल होंगे.

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प्राइवेट सेक्‍टर से आने वालों को सरकार द्वारा संयुक्‍त सचिव के रूप में इसलिए नियुक्‍त किया जाता है, क्‍योंकि इस पद का मतलब है विशेषज्ञता. यानी संयुक्‍त सचिव बनने वाले अधिकारियों को सरकार एक्‍सपर्ट के तौर पर देखती है. उन्‍हें खास विदेश दौरों पर भेजा जाता है. उन्‍हें स्‍पेशल ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि वे खास तरह के काम को कुशलतापूर्वक अंजाम दे सकें.

योग्यता के अनुसार सामान्य ग्रेजुएट और किसी सरकारी, पब्लिक सेक्टर यूनिट, यूनिवर्सिटी के अलावा किसी प्राइवेट कंपनी में 15 साल काम का अनुभव रखने वाले भी संयुक्‍त सचिव पद के योग्‍य हो सकते हैं. वैसे यह मामला बहुत ताजा नहीं है. लंबे समय से सरकारी क्षेत्र के उच्‍च पदों पर प्राइवेट सेक्‍टर के लोगों की भर्ती की मांग उठती आ रही है. इसे देखते हुए नरेंद्र मोदी सरकार ने 2015 में लेटरल एंट्री प्रोसेस में बड़ा संशोधन किया

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सरकार द्वारा किए गए इस बड़े बदलाव का सबसे बड़ा कारण विभिन्‍न सरकारी महकमों में विशेषज्ञों की कमी बताई जाती है. माना जाता है कि प्राइवेट सेक्‍टर में लंबे अनुभव रखने वालों की सरकारी क्षेत्र में एंट्री से सरकारी कामकाज के तरीके पेशेवर बनेंगे, जिसका फिलहाल अभाव है. भारत के नौकरशाहों की अक्‍सर उनके शाही अंदाज और तौर-तरीकों के लिए आलोचना की जाती है, जिससे सरकारी योजनाओं की क्रियान्‍वयन प्रक्रिया सुस्‍त हो जाती है. इसका नकारात्‍मक असर समाज और देश के विकास पर होता है.

भारत सरकार में 34 साल तक वरिष्‍ठ पदों पर काम करने वाले सेवानिवृत आईएएस अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह के अनुसार, केंद्र सरकार ने इसके लिए यूपीएससी सर्विस रूल्‍स में संशोधन किया है. इसके तहत संयुक्‍त सचिव बनने के लिए आपको प्राइवेट सेक्‍टर में उच्‍चाधिकारी बनना भी जरूरी है. बल्कि सरकार किसी प्राइवेट पर्सन को भी इस पद पर नियुक्‍त कर सकती है.

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वैसे तो इन पदों पर नियुक्त होने वालों का कार्यकाल 3 वर्ष रखा गया है, लेकिन सरकार इसे बढ़ा सकती है. इन पदों पर आवेदन के लिए अधिकतम उम्र की सीमा तय नहीं की गई है, जबकि न्यूनतम उम्र 40 साल है. इनका वेतन केंद्र सरकार के अंतर्गत जॉइंट सेक्रटरी वाला ही होगा तथा सारी सुविधा उसी अनुरूप ही मिलेगी. इन्हें सर्विस रूल की तरह काम करना होगा और दूसरी सुविधाएं भी उसी अनुरूप मिलेंगी. इस पद पर चयन के लिए केवल साक्षात्कार देना होगा और कैबिनेट सेक्रटरी के नेतृत्व में बनने वाली समिति इनका साक्षात्कार लेगी.

 

 

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