जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी का नाम आते ही, जेहन में दो ही चीजें आती है। एक तो वहां की विश्वतस्तरीय पढ़ाई और दूसरा वहां के खुलेपन के साथ आए दिन होने वाले प्रदर्शन। अपने प्रदर्शनों और आयोजनों के लिए विख्यात ये यूनिवर्सिटी वाम छात्र संगठनों के सियासत का गढ़ भी है। पिछले दिनों इसी यूनिवर्सिटी में लगे देश विरोधी नारों के बाद इसने दुनियाभर में सुर्खियां बंटोरी थी। तब इस युनिवर्सिटी पर तरह तरह के सवाल भी उठे थे। और तभी से यहां वाम बनाम दक्षिण की लड़ाई और तेज़ हो गई है।

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय

मोदी सरकार के आने के बाद इस विश्वविद्यालय की फिजा थोड़ी बदली-बदली सी दिख रही है। और यही वजह है, कि इन दिनों दक्षिणपंथी छात्र संगठन कई तरह के यहां आयोजन कर रहे हैं। इसी कड़ी में 15 अगस्त को एबीवीपी की ओर से किए जाने वाले आयोजन में एक ऐसी शख्सीयत को यहां बुलाया गया है, जिसके आने से यूनिवर्सिटी में बवाल होना तय है। दरसअसल एबीवीपी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बस्तर के आईजी रह चुके एसआरपी कल्लूरी को आमंत्रित किया गया है, जो नक्सलवाद पर अपने विचार रखेंगे।

पूर्व बस्तर आईजी एसआरपी कल्लूरी

हाल ही में बस्तर जाकर खुद JNU एबीवीपी के अध्यक्ष सौरभ कुमार ने एसआरपी कल्लूरी को इनवाइट किया था और उन्हें कार्यक्रम में आने का न्योता दिया है, जिसे कल्लूरी ने स्वीकार भी कर लिया है। हालांकि कल्लूरी के आने पर अभी सस्पेंस बना है, उनकी तबीयत खराब होने की वजह से, उन्होंने कार्यक्रम में आने पर 14 तारीख को स्पष्ट करने की बात की है। लेकिन कल्लूरी की आने की खबर भर से वाम संगठन सक्रीय हो गए हैं और कल्लूरी के विरोध की रणनीति तैयार करने के लिए बैठकों का दौर शुरू हो गया है।

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Demo pic- प्रदर्शन करते वाम छात्र संगठन

इसलिए हो रहा है कल्लूरी का विरोध

बस्तर के आईजी रह चुके कल्लूरी पर आरोप लगते रहे हैं, कि उन्होंने नक्सलियों की आड़ में बस्तर के आदिवासियों पर अत्याचार किए और उन अत्याचारों की पोल खोलने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का विरोध किया। कल्लूरी पर कई फर्जी मुठभेड़ों के आरोप भी लगे हैं। साथ ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी अपनी एक रिपोर्ट में कल्लूरी के कार्यकाल पर सवाल उठाए हैं। उनके कार्यकाल में बीजापुर जिले में पुलिसकर्मियों पर 16 आदिवासी महिलाओं के साथ बलात्कार के आरोप भी लगे हैं। इसीलिए वामपंथी संगठन कल्लूरी का विरोध करते हैं। इससे पहले भी जब हाल ही में कल्लूरी IIMC संस्थान में एक कार्यक्रम में शिरकत करने आए थे, तो उनका खूब विरोध किया गया था।

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कौन हैं एसआरपी कल्लूरी ?

हमेशा माथे पर सफेद भभूत का तिलक लगाकर रखने वाले भारतीय पुलिस सेवा के 1994 बैच के अधिकारी शिवराम प्रसाद कल्लूरी पहली बार तब चर्चा में आए थे, जब मध्यप्रेदश से छत्तीसगढ़ अलग हुआ और जोगी छत्तीगढ़ के पहले सीएम बने। कल्लूरी को अजीत जोगी का खास माना जाता था। बिलासपुर के एसपी रहने के दौरान उनपर ये भी आरोप लगे, कि उन्होंने कांग्रेस में शामिल होने के लिए बीजेपी कार्यकर्ताओं पर दबाव बनाया। लेकिन असल में उनके नायक और खलनायक बनने की कहानी सरगुजा से शुरू हुई। सरगुजा में कल्लूरी ने बड़ी ही चालाकी से नक्सलियों के संगठन में सेंध लगाई और कई मुठभेडों को अंजाम देकर कई नक्सलियों को मार गिराया और बचे हुए नक्सलियों को झारखंड और बिहार भागने के लिए मजबूर कर दिया।

Demo pic- नक्सलियों को सरेंडर

एसआरपी कल्लूरी को 2006 में भारत सरकार की ओर वीरता पुलिस मेडल भी मिल चुका है। नक्सलियों के लिए काल माने जाने वाले कल्लूरी इसीलिए रमन सरकार की पहली पसंद बने और उन्हें नक्सल ऑपरेशन का डीआईजी बनाकर दंतेवाड़ा भेजा गया। इस दौरान कल्लूरी ने बस्तर के सुदूर इलाकों में आदिवासियों के बीच अपनी पैठ बनाई। आदिवासियों को पापा और मामा कहकर उनसे निजी रिश्तें बनाएं और नक्सलियों की जानकारियां इकट्ठा कर कई मुठभेड़ों को अंजाम दिया लेकिन ताड़मेटला, मोरपल्ली और तिम्मापुरम में एक बड़ा हादसा हुआ यहां आदिवासियों के 252 घरों को जलाया गया कई महिलाओं से बलात्कार हुआ और सुरक्षाबलों पर तीन महिलाओं की हत्या का आरोप भी लगा। इन आरोपों ने कल्लूरी की मुश्किलें बढ़ाई तो सरकार को उन्हें वहां से हटाना पड़ा।

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लेकिन 2014 में एकबार फिर सरकार ने कल्लूरी को बस्तर की कमान सौंपी और इसबार वो पावरफुल बनकर आईजी के तौर पर बस्तर गए। बस्तर फिर पुलिस छावनी में तब्दील हो गया और मुठभेड़ों और आत्मसमर्पण का सिलसिला फिर शुरू हुआ। कल्लूरी पर बस्तर में प्रोपेगेंडा के तहत मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ लड़ाई छेड़ने के आरोप लगने लगे। उनके कार्यकाल में पत्रकारों, वकीलों पर हमले हुए। पत्रकारों की गिरफ्तारियां की गई, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ भी मुकदमे दर्ज किए गए। सामाजिक कार्यकर्ता बेला भाटिया के घर पर हमला हुआ। कल्लूरी के खिलाफ विवादों की सूचि इतनी लंबी हो गई कि सरकार को फिर उन्हें वहां से हटाना पड़ा। अभी कल्लूरी पुलिस मुख्यालय में अटैच हैं लेकिन उऩकी नक्सिलियों के खिलाफ आक्रामकता और कार्यशैली ने उन्हें फेमस बना दिया है।

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