प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार में आने से पहले ही जनता से ये वादा किया था कि ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा’ 2019 के लोकसभा चुनाव में जिन मुद्दों ने मोदी सरकार को प्रचंड बहुमत दिलाया उसमें से एक भष्ट्राचार का मुद्दा भी था. वही भ्रष्टाचार जिसकों जड़ से खत्म करने की बात पीएम मोदी ने अपनी हर चुनावी रैली से कही थी पर अब जनता से किए उन वादों पर एक्शन लेने का समय आ गया है. सरकार में वापसी के बाद नरेंद्र मोदी ताबड़तोड़ फैसले लेने से नहीं चूक रहे है. फिर चाहें वो जनता से किए वादे हो या फिर भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फैकने की लड़ाई.पीएम मोदी ने अपने वादों पर आगे बढ़ते हुए एक बार फिर सर्जिकल स्ट्राइक कर दी है. जी हां सर्जिकल स्ट्राइक ओर वो भी भारत में लेकिन अब सर्जिकल स्ट्राइक का ये प्रहार भ्रष्टाचार के खिलाफ है. भ्रष्टाचार  को जड़ से उखाड़ फैकने में मोदी सरकार कोई ओर तरीका नहीं बल्कि कानून का रास्ता ही निकाल  रही है ।

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इस बार मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार से मुक्ती के लिए भारतीय कानून में शामिल डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स के नियम 56 के तहत 12 अफसरों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है. जी हां वित्त मंत्रालय ने इन अफसरों को समय से पहले ही रिटायरमेंट दे दिया है. वहीं वित्त मंत्रालय जिसका कार्यभार निर्माला सिताराण ने संभाला है और वित्त मंत्रालय के कार्यभार को संभालते ही सितारमण ने आलसी और बेहिसाब संपत्ति वाले लोगों पर शिकंजा कसना शुरु कर दिया है. इसको मोदी सरकार का भष्ट्राचार पर बड़ा एक्शन माना जा रहा है. हम आपकों बता दें कि जिन 12 अफसरों को समय से पहले नियम 56 के तहत रिटायर किया गया है उनपर भ्रष्टाचार, अवैध और बेहिसाब संपत्ति के अलावा यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप थे ।

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लेकिन अब आप ये सोच रहे होंगे कि नियम 56 ए के तहत आधिकारियों को समय से पहले कैसे निकाला जा सकता है,,,,,,,,
दरअसल, वित्त मंत्रालय की ओर से रुल 56 का इस्तेमाल ऐसे अधिकारियों पर किया जा सकता है जो 50 से 55 साल की उम्र के हों और 30 साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं. सरकार के जरिए ऐसे अधिकारियों को अनिर्वाय रिटायरमेंट दिया जा सकता है. ऐसा करने के पीछे सरकार का मकसद नॉन-फॉर्मिंग सरकारी सेवक को रिटायर करना होता है. सरकार के जरिए अधिकारियों को अनिवार्य रिटायरमेंट दिए जाने का नियम काफी पहले से ही चला आ रहा है. हालांकि आने वाले वक्त में मोदी सरकार रूल 56 का इस्तेमाल करके और अधिकारियों को भी अनिर्वाय रिटायरमेंट दे सकती है. इस नियम के तहत कुछ और अफसरों पर भी गाज गिर सकती है. आने वाले समय में आलसी और बेहिसाब संपत्ति वाले अधिकारियों को रूल 56 का सामना करना पड़ सकता है ।

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ऐसा करने के पीछे सरकार की मंशा आलसी और न के बराबर काम करने वाले अधिकारियों को उनके काम से मुक्ति दिलाना है. सुत्रों के मुताबिक  सरकार ने खराब परफॉर्मेंस करने वाले अधिकारियों की लिस्ट भी बनाई है. वहीं  दूसरी तरफ समय सीमा से पहले रिटायरमेंट देने वाली इस प्रक्रिया से रोजगार में भी इजाफा होगा. क्योंकि जब सरकारी पद खाली होंगे तो उस पर नौकियां होगी और जब नौकियां होगी तो रोज़गार के अफसर पैदा होंगे ।

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