इन दिनों ज्यादातार कारोबारी और नौकरीपेशा आपको परेशान ही मिलेंगे. सबकी परेशानी एक ही है, टैक्स रिटर्न फाइल करना है. पहले तो इसके आखिरी तारीख 31 दिसंबर ही थी…लेकिन अब इसे एक महीना और आगे बढ़ा दिया गया है. यानी आप अब 31 अगस्त तक टैक्स रिटर्न फाइल कर सकते हैं. इससे ज्यादा लेट किया तो आपपर 5000 हजार रुपए का जुर्माना लग सकता है.

वैसे, आमतौर पर लोग टैक्स भरने से कतराते हैं. लेकिन बहुत कम ही लोगों को ये जानकारी होगी कि अगर आपकी इनकम टैक्सेबल भी नहीं है फिर भी आपको टैक्स भरना चाहिए. क्योंकि इसके कई बड़े-बड़े फायदे हैं. आयकर कानून के मुताबिक, 2.5 लाख रुपये की टैक्स छूट की सीमा के अंदर कमानेवाले लोगों को आईटीआर यानी की इनकम टैक्स रिटर्न भरने की कोई बाध्यता नहीं है.

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इसी तरह 60 से ज्यादा और 80 से कम उम्र के लोगों की सालाना आमदनी 3 लाख रुपये और 80 साल से ऊपर की उम्र के किसी इंसान की सालाना आमदनी 5 लाख रुपये है तो उन्हें भी आईटीआर भरने की कानूनी बाध्यता नहीं है. लेकिन इसके बावजूद अगर आप आईटीआर फाइल करते हैं, तो इसके आपको कई फायदे हो सकते हैं. मान लीजिए कि आपको ज़रूरी काम है और कर्ज चाहिए, लेकिन बैंक आपको कर्ज तभी देते हैं, जब आपकी कुछ इनकम हो, भले ही आप लाखों रुपए कमाते हो लेकिन उसका कोई प्रूफ नहीं है, तो ये बैंक के लिए बेकार है और आपके लिए भी। इसलिए आपकी आमदनी की पुष्टि आपकी ओर से फाइल आईटीआर से होती है. इनकम टैक्स रिटर्न से आपकी कुल सालाना इऩकम और इस पर दिए गए टैक्स का ब्योरा होता है. इसी जानकारी के आधार पर औपको लोन मिलता है और साथ ही आपके वीजा जारी करने का फैसला भी इसी ITR के आधार पर लिया जाता है.

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ITR Form

अगर आपकी इनकम टैक्सेबल नहीं है. बल्कि आपका खर्च इनकम से ज्यादा है. इन हालातों में इनकम टैक्स के नियम ते तहत आप नुकसान की कैपिटल गेंस पर लग रहे टैक्स से भरपाई कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए आपको संबंधित आंकलन वर्ष का आईटीआर फाइल करना ज़रूरी होता है. ताकि आपको अभी जो नुकसान हुआ है, उसकी भारपाई आनेवाले वर्षों में आप कर सके.
अगर आप कोई बड़ा लेन-देन यानी ज्यादा पैसे का कोई लेन-देन करते हैं तो आईटीआर आपके लिए मददगार साबित होता है. समय पर आईटीआर फाइल करते रहने की वजह से प्रॉपर्टी खरीदने-बेचने, बैंक में बड़ी रकम जमा करने, म्यूचुअल फंड में बड़े निवेश के बाद आपको इनकम टैक्स विभाग से नोटिस आने का खतरा नहीं होता.

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हालांकि, मोटर वीइकल्स एक्ट दुर्घटना में हुई मौत या अपंगता होने पर मुआवजे का दावा करने के लिए आईटीआर की ज़रूरत नहीं बताता लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने सेल्फ-एंप्लॉयड पर्सन्स के मामले में आईटीआर की जरूरत बताई तो क्लेम्स ट्राइब्यूनल इस पर जोर देने लगे हैं. दरअसल, कंपनसेशन की रकम तय करते वक्त संबंधित व्यक्ति की आय को आधार बनाया जाता है. तब आईटीआर इनकम के सबूत के तौर पर पेश किया जा सकता है. अगर आप प्राइवेट सेक्टर में काम करते हैं तो सैलरी स्टेटमेंट और छह महीने के बैंक स्टेटमेंट ही पर्याप्त माना जाते हैं.

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ये तो हुई आपके फायदे की बात..लेकिन अगर आप देश के अच्छे नागरिक है और कानून का सम्मान करते हैं, तो आपको अपनी आमदनी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को बतानी ही चाहिए. इसलिए आईटीआर भरना जरूरी है.

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