भारतीय इतिहास में कई राजा-महाराजा हुए। उनके पराक्रम और वीरता की कई कहानियां आपने पढ़ीं और सुनी होंगी। इन राजाओं में कई ऐसे राजा हुए हैं, जो अपने रुतबे के साथ ही शौक की वजह से भी मशहूर थे। खासतौर पर नवाब, नवाबों के शौक किस्से आज भी मशहूर हैं, जिनकी मिसालें आज भी दी जाती है। किस्सा कहानी में आज बात ऐसे ही एक नवाब की, जिनके शौक ने उन्हें दुनियाभर में मशहूर किया और इतिहास के पन्नों में वे हमेशा के लिए कैद हो गए।

राजघराने में शादी हो, तो उसकी तैयारियों महीनों पहले से शुरू हो जाती हैं। देश-विदेश के मेहमानों को बुलावा भेजा जाता है। इन महाराजा के घर भी शादी होने वाली थी। जाहिर है, यहां भी तैयारियां वैसी ही हुई होंगी। लेकिन ये कोई आम शादी नहीं थी। इस शादी ने उस दौर में दुनिया भर में खूब सूर्खियां बंटोरी थीं। ये शादी न सिर्फ ख़ास थी, बल्कि अजीबोगरीब भी थी। अजीबोगरीब इसलिए कि ये शादी किसी इंसान की नहीं, बल्कि एक कुतिया की थी। और खास इसलिए, कि इस शादी में ब्रिटिश इंडिया के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इर्विन और उनकी पत्नी लेडी इर्विन को न्योता भेजा गया था।

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अपनी कुतिया के साथ महाबात खां

एक कुतिया की शादी में देश के महाराजाओं के साथ ही वायसराय को बुलाने की हिम्मत करने वाला कोई और नहीं, जूनागढ़ रियासत (गुजरात) के नवाब महाबत खां थे। महाबत खां को कुत्तों से बेहद मोहब्बत थी। उन्होंने हजार कुत्तों की बकायदा एक ब्रिगेड ही बना रखी थी। हर एक कुत्ते की देखभाल किसी शहजादे-शहजादी से कम नहीं होती थी।

जूनागढ़ में महाबत खां का मकबरा

बहरहाल नवाब की दुलारी रोशनआरा की शादी की तैयारियों जोरों पर थी। आपको बता दें, ये रोशनआरा मुगल बादशाह औरंगजेब की बहन नहीं, बल्कि नवाब महाबत खां की दुलारी कुतिया का नाम था। शादी को लेकर पूरे रियासत में चहल-पहल थी। शादी के लिए रियासत में तीन दिनों की छुट्टी का ऐलान कर दिया गया था। बारात मंगलौर(कर्नाटक) से आनी थी। रोशनआरा की शादी महाबत खां के बहनोई और मंगलौर के नवाब के शिकारी कुत्ते बूबी से होनी थी।

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गोल्‍ड जुलरी में महाबत खां की कुतिया

निकाह की मुबारक घड़ी भी आ गई। नवाब की लाडली कुतिया रोशनआरा को सेंट और इत्र से नहलाया गया। हीरे जेवरात से लदी रोशनआरा दुल्हन की तरह सज-धज कर तैयार थी। बारात की आगवानी करने नवाब महाबत खां खुद जूनागढ़ रेलवे स्टेशन पहुंचे। नवाब के साथ करीब 250 कुत्तों का हुजूम हाथियों पर सोने-चांदी के हौदे में सवार होकर बारात की आगवानी के लिए गया था। रोशनआरा के शोहर बूबी के स्वागत में रेलवे स्टेशन में लाल कालीन बिछाई गई। बूबी को फौजी सलामी भी दी गई। नवाब जूनागढ़ के महल दरबार हॉल को इस मौके पर खास तरीके से सजाया गया था

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नवाब के महल का दरबार हाल

इसी दरबार हॉल में काजी की मौजूदगी में कत्ते बूबी और कुतिया रोशनआरा के निकाह की रस्मअदायगी पूरी हुई। हालांकि तब जमाना तो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का नहीं था, लेकिन इस शादी को कवर करने देश विदेश के नामी अखबारों के जर्नलिस्ट जूनागढ़ पहुंचे थे। हालांकि इस शादी में बड़े-बड़े राजे रजवाड़े और ब्रिटिशर्स शामिल हुए, लेकिन वायसराय लार्ड इर्विन और लेडी इर्विन नहीं आए। रोशनआरा की शादी के बाद उत्तर भारत के दूसरे रियासतों में भी अपने पालतू जानवरों की शादी का फैशन चल पड़ा। बाद में जींद और पटियाला जैसी रियासतों में भी ऐसी शादियां देखने को मिली।

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