अगर आप दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति हो,तो आप सोच सकते हो कि आपकी लाइफ स्टाइल कैसी होगी। लेकिन आप कल्पना भी नहीं कर सकते कि एक समय दुनिया का सबसे अमीर कहलाने वाला शख्स जानबूझ कर फटीचर हालत में गुजर बसर करता हो। 22 फरवरी 1937 के अपने अंक में अमेरिका की प्रतिष्ठित टाइम मैगजीन ने इस शख्स की तस्वीर अपने कवर पेज पर छापी थी। मैगजीन ने इस शख्स को उस समय दुनिया का सबसे रईस व्यक्ति बताया था। बात हैदराबाद के आखिरी नवाब मीर उस्मान अली खान आसफ जाह की, जो 1911 में नवाब महबूब अली खान के बाद गद्दी पर बैठे। कहते हैं, नवाब की तिजोरी से लेकर तहखाने बेशकीमती हीरे जवाहरातों से भरे पड़े थे। कई टन सोने से लदे ट्रक निजाम के तहखाने में खड़े रहते थे। हजारों नौकर-चाकर और यूरोप के किसी देश के जितना बड़ा विशाल हैदराबाद रियासत सब कुछ तो था निजाम के पास। लेकिन निजाम उस्मान अली खान तबीयत से बेहद कंजूस मिजाज के थे।

22 फरवरी 1937 के टाइम मैगजीन के अंक के कवर पेज पर निजाम उस्मान अली खान की तस्वीर

निजाम हमेशा एक लाल तुर्की टोपी पहनते थे। तीस चालीस बरस पुरानी तुर्की टोपी इतनी बेरंग और बेकार हो चुकी थी, कि ये जगह-जगह से फट गई थी। लेकिन भला मजाल है, कि निजाम अपने लिए नई टोपी बनवा लेते। दुनिया का ये सबसे अमीर शख्स या तो लोगों से मांग कर सिगरेट पिया करता था या काम चलाने के लए बेहद साधारण चारमीनार ब्रांड का ही कश लगाया करते थे। इससे जुड़ा एक दिलचस्प वाकया भी है। एक बार वीपी मेनन, जो उस समय भारत सरकार की ओर से रियासतों के एकीकरण का काम देख रहे थे, निजाम से मिलने आए। निजाम ने मेनन को वही अपना चारमीनार ब्रांड पेश किया। लेकिन बड़े अदब से मेनन ने इनकार करते हुए अपना युरोपीय ब्रांड वाला सिगरेट निजाम को पेश किया।निजाम ने मेनन के इस आग्रह पर एक के बजाय चार-पांच सिगरेट निकालकर उसे अपने खाली डिब्बे में रख लिया और जब दोबारा कई वर्षों के बाद मेनन से उनकी मुलाकात फिर हुई तो उन्होंने उन्हीं सिगरेट में से एक उन्हें ऑफर कर दी थी।

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दिल्ली में अधिकारियों के विदाई समारोह में संबोधित करते वीपी मेनन

मोटरकार के शौकीन निजाम

निजाम उस्मान अली मोटरकार के बड़े शौकीन थे। उनके गैराज में करीब चार-पांच सौ से ज्यादा मोटरकारों का जखीरा था। लेकिन ऐसा नहीं, कि ये सभी मोटरकार निजाम खरीदा करते थे। दरअसल निजाम को अपनी रियासत में कोई कार में घूमता नजर आ जाए और वो कार निजाम को पसंद आ जाए, तो फौरन ही निजाम अपने सिपहसालार को उसके पीछे भेज दिया करते थे। जिसके बाद निजाम का आदमी उस शख्स के पास जाकर कहता कि आपकी गाड़ी निजाम को बेहद पसंद आई है और वे उसे चलाकर देखना चाहते हैं। बेचारा मोटरकार का मालिक तो ये सोच कर खुश होता, कि निजाम ने उन्हें इज्जत बख्शी है। लेकिन एक बार अगर वो मोटरकार निजाम के पास आ जाए तो दोबारा वो उनके गैराज से बाहर नहीं निकलती थी और इस तरह मोटरकार का मालिक हाथ मलता रह जाता था।

निजाम उस्मान अली खान की विंटेज कारें

जेवरात इकट्ठा करने का शौक था नवाब को

कंजूस निजाम उस्मान अली ने हीरे जवाहरात इकट्ठे करने के कई नायाब तरीके इजाद किए हुए थे।निजमा अपने अफसरान और परिचितों की शादी में पहुंच जाया करते थे।मेजबान बेचारा निजाम को मेहमान पाकर खुद पर फक्र महसूस करता।लेकिन निजाम अपने आदत के मुताबिक शादी के लिए बने जेवरातों में से सबसे कीमती जेवरातों में से कोई एक जेवरात उठा लिए करते थे।

निजाम के मेहमान को महंगी पड़ती थी एक गिलास शैंपेन

कंजूसी में निजाम को कोई सानी नहीं था। लेकिन उन पार्टियों में वो उतनी कंजूसी नहीं बरतते थे जिसका खर्च निजाम को नहीं शाही खजाने को उठाना पड़ता था। हालांकि इस पार्टी की आड़ में भी निजाम दौलत कमाने का मौका नहीं छोड़ते थे।निजाम की आदत थी, कि हर शाही दावत में वो शहर के किसी अमीर शख्स को टारगेट कर उसे एक गिलास शैंपेन भेंट किया करते थे। निजाम से इतनी इज्जत पाकर वो शख्स भी खुद में फूला नहीं समाता था। लेकिन निजाम के इस एहतराम(इज्जत) की कीमत उसे भी लाखों रुपए के उपहार देकर चुकानी पड़ती थी।

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निजाम के जेवरात,ऊपर बाएं विश्व प्रसिद्ध जैकब हीरा

बिलियन डॉलर के मालिक होते हुए भी निजाम फटे पुराने कपड़े पहनते थे। बेहद साधारण बर्तन में खाना खाते थे। बुढ़ापे के दिनों में तो वो कहीं ज्यादा कंजूस हो गए थे। पैसों के मामले में वो बेहद शकी मिजाज के थे। अपने खजाने की चाबी हमेशा अपने पास ही रखते थे। उन्हें सोते-जागते अपने हीरे जवाहरातों की चिंता सताती रहती थी। कई बार तो वो खुद अपने तहखाने में जाकर वहां रखी सोने की ईंटो में लगी धूल को कपड़ों से साफ किया करते थे। निजाम के पास कोहिनूर के बाद उस समय का दूसरा सबसे बेशकीमती हीरा जैकब था, जिसे वो कभी-कभी अकेले में निकालकर अपनी टेबल पर पेपरवेट की तरह इस्तेमाल किया करते थे। निजाम को ये डर था की कहीं ये हीरा चोरी न हो जाए इसलिए वो इस हीरे को बेहद साधारण सोप केस के अंदर छिपा कर रखते थे ताकि किसी को शक न हो।

बेहद साधारण परिधान में डेलिगेट्स के बीच निजाम उस्मान अली खान

निजाम और मक्खन

निजाम उस्मान अली को मक्खन बेहद पसंद था। उस समय भारत में दतिया रियासत(मध्यप्रदेश) का मक्खन बड़ा मशहूर था। निजाम ने दतिया महाराज के पास संदेश भिजवाकर अपनी इच्छा जाहिर की। नवाब की गुजारिश पर दतिया के महाराजा ने करीब बारह दर्जन मक्खन के डिब्बे हैदराबाद पहुंचवा दिए। हैदराबाद में मक्खन पहुंचते ही निजाम ने मक्खन के डिब्बों को फौरन अपने तहखाने में रखवा दिया। साल गुजर जाने के बाद मक्खन के कनस्तर वहीं रखे-रखे सड़ गए।तहखाने से बदबू आने लगी। लेकिन किसी की हिम्मत नहीं हुई, कि ये खबर निजाम तक पहुंचा दे। बाद में रियासत के प्राइम मिनिस्टर सालार जंग ने ये सूचना नवाब को दी, लेकिन नवाब ने उन्हें गुस्से में डांट डपटकर भगा दिया। बाद में हैदराबाद के कोतवाल मिस्टर रेड्डी ने बड़ी हिम्मत जुटाकर नवाब से बात की, तो नवाब ने आदेश दिया की इन मक्खनों के डिब्बों को मंदिरों में बंटवा दो, वहां ये किसी न किसी काम आ जाएंगे। थोड़ी देर सोचने के बाद मिस्टर रेड्डी वहां से विदा हुए और बाद में उन्होंने मक्खन के डिब्बों को महल से बाहर निकलते ही एक नाले में फिंकवा दिया। वो जनाब वापस निजाम के पास आए और उनके हाथ में 201 रुपए रख दिए और कहा लीजिए सर आपका सारा मक्खन मैने बिचवा दिया। निजाम ने बड़े गर्व के भाव से उनकी पीठ थप-थपायी और उस रकम को खजाने में डाल देने के लिए कह दिया।

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निजाम उस्मान अली खान आसफ जाह (6 अप्रैल 1886- 24 फरवरी 1967)

इतनी दौलत लेकिन आखिरी समय में कुछ काम न आया।हैदराबाद के विलय के बाद 46 करोड़ रुपए का निजाम का एक ट्रस्ट बना दिया गया। भारत सरकार की सलाह पर निजाम के हीरे जवाहरातों को बैंको में सुरक्षित रखवा दिया गया। कहते हैं, उस समय इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया (अब स्टेट बैंक) की मुंबई शाखा में निजाम के जवाहरात लाए गए। कई गाड़ियों में लदे ये जवाहरात बैंक लाए गए लेकिन बैंक के तहखाने और लॉकर भी इन जवाहरातों को रखने के लिए छोटे पड़ गए। बाद में मर्केंटाइल बैंक में अलग से मजबूत तहखाने बनवाए गए जहां बचे हुए जवाहरात रखवाए गए। दरअसल 1967 में निजाम की संपत्ति को भारत सरकार ने उनके परिजनों से 240 करोड़ रुपए में खरीद लिया था। जिसकी अब कीमत लगभग 2.50 लाख करोड़ रुपए है। फिलहाल निजाम के हीरे जवाहरात रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पास हैं।

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