देश में किसी सड़क, चौराहे, शहर या रेलवे स्टेशन का नाम बदलना आम है।लेकिन इस बार एक रेलवे स्टेशन का नाम बदलने को लेकर विरोध के सुर संसद तक सुनाई दे रहे हैं। एशिया के सबसे बड़े रेलवे यार्ड मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर रखने को लेकर सियासत पूरे शबाब पर है। वैसे तो मुगलसराय का ताल्लुक पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री से भी है। 2 अक्टूबर 1904 को मुगलसराय में ही लालबहादुर शास्त्री का जन्म हुआ था। ऐसे में सवाल उठता है कि मुगलसराय का नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर ही क्यों ? हालांकि केंद्र सरकार इस साल पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्मशती मना रही है। लेकिन फिर वही सवाल आखिर मुगलसराय का नाम ही पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर क्यों?  मुगलसराय से पंडित जी का नाता क्या है ? आईए तारीख के पन्नों को पलट कर इतिहास को एक बार फिर खंगालते हैं।

मुगलसराय रेलवे स्टेशन

10 फरवरी 1968 के जनसंघ के अध्यक्ष पंडित दीनदयाल उपाध्याय सियालदाह एक्सप्रेस में सवार होकर दिल्ली से पटना के लिए रवाना हुए। रात के सन्नाटे को चीरती हुई ट्रेन पटना की ओर दौड़ी चली जा रही थी। ट्रेन के फर्स्ट क्लास के बी कैबिन में बैठे पंडित जी आने वाले खतरे से बिलकुल अनजान थे। उसके बाद 10 और 11 फरवरी की दरम्यानी रात क्या हुआ ये आज भी रहस्य है। बहरहाल 11 फरवरी तड़के 3.45 पर मुगलसराय रेलवे स्टेशन का लीवरमैन भागता हुआ स्टेशन मास्टर के पास आया और उनसे हांफते हुए कुछ कहा। तुरंत ही पुलिस और कुछ कर्मचारी स्टेशन यार्ड के पोल नंबर 1276 के पास पहुंचे। पोल के पास करीब पचास-बावन साल के एक शख्स का शव पड़ा हुआ था। शव के हाथ में एक पांच रुपए का नोट मुट्ठी में दबा हुआ था। सुबह शव को स्टेशन पर लाया गया। लोगों की भीड़ वहां इकट्ठा थी। अब तक ये पता नहीं चल पाया था कि मृतक कौन है। तभी वहां से गुजरता से एक शख्स जोर से चीखा, अरे$$$$! पंडित जी।

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मुगलसराय स्टेशन के पास पटरी किनारे पड़ा दीनदयाल उपाध्याय का शव

ये शख्स आरएसएस नगर संघ चालक गुरुबख्श कपाही थे, जिन्होंने शव की पहचान तत्कालीन जनसंघ अध्यक्ष पंडित दीनदयाल उपाध्याय के रुप में की। कहा जाता है, जब इसकी सूचना दिल्ली में अटल बिहारी वाजपेयी को मिली तो अपने राजनैतिक गुरु की मौत की खबर सुनकर वो फूट-फूट कर रोए थे। बहरहाल पंडित जी के मौत की खबर मिलते ही सर संघचालक गोलवलकर और अटल बिहारी वाजपेयी मुगलसराय आए और दीनदयाल जी के पार्थिव शरीर को लेकर दिल्ली ले गए, जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की शव यात्रा

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की मौत अपने पीछे कई सवाल छोड़ गई। जिन हालातों में पंडित जी का शव रेल ट्रैक के किनारे पाया गया था, वो कतई स्वाभाविक मृत्यु नहीं थी। हालांकि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु की तरह दीनदयाल जी की मृत्यु के रहस्य से भी आज तक पर्दा नहीं उठ पाया है। लेकिन बढ़ते विरोध के बीच उस समय सीबीआई ने मामले की जांच के लिए एक विशेष टीम बनाई। घटना के दो हफ्ते बाद सीबीआई ने भारत लाल और राम अवध नाम के दो शख्स को गिरफ्तार किया। सीबीआई की जांच रिपोर्ट के मुताबिक इन दोनों को अपना बैग चोरी करते समय पंडित जी ने रंगे हाथ पकड़ लिया था,जिसके बाद उन्हें पुलिस में सौपने की धमकी के बाद दोनों ने पंडित जी को ट्रेन से नीचे धकेल दिया। हालांकि सीबीआई की इस थ्योरी को बनारस के सेशन कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया था।

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बाद में केंद्र सरकार ने राजनैतिक दलों की मांग पर जस्टिस वाईवी चंद्रचूड़ की अगुवाई में एक और जांच कमेटी बनाई गई। लेकिन पंडित दीनदयाल उपाध्याय की मौत को लेकर कोई भी जांच कमेटी किसी सटीक नतीजे पर पहुंचने में नाकामयाब ही रही। आज भी गाहे बगाहे पंडित जी के मौत की जांच कराए जाने की मांग उठती रहती है। हालांकि ये महज इक्तेफ़ाक नहीं हो सकता की इससे पहले 1953 में जनसंघ के संस्थापक और तत्कालीन अध्यक्ष श्यामा प्रासद मुखर्जी की कश्मीर के जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई। इसके ठीक दस साल बाद जनसंघ के ही अध्यक्ष आतार्य रघुवीर की कानपुर के पास सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी।

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एक बैठक में गोलवलकर,पंडित दीनदयाल उपाध्याय(बीच),अटल बिहारी वाजपेयी

25 सितंबर को जनसंघ के पुरोधा पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्मजयंति है। खुद केंद्र सरकार भी उनकी जन्मशती मना रही है। कई केंद्रीय योजनाएं इस वक्त पंडित जी के नाम से चलाई जा रही है। ऐसे में मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर किए जाने के ऐलान के बाद ये शहर और शख्सियत दोनों चर्चा में हैं।

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