क्या आपने कभी आत्माओं को देखा है. या फिर क्या आप भी विश्वास करते हैं कि आत्माएं होती हैं. आप में से कई लोगों का मानना होगा कि आत्माएं है पर कई लोग ऐसे भी हैं जो इन बातों पर विश्वास ही नहीं करते. अब जो विश्वास नहीं करते उन लोगों ने हॉरर फिल्में तो देखी ही होंगी. अगर देखी हैं तो आपने इन फिल्मों में अक्सर देखा होगा कि जिंदा रहते अगर किसी इंसान की कोई ख्वाहिश अधूरी रह जाती है, तो वो इंसान मरने के बाद आत्मा का रूप लेकर अपनी ख्वाहिश को पूरा करने की कोशिश करता है.

हकीकत कहो या कल्पना लेकिन आज कि हमारी इस खबर में हम ऐसा ही कुछ आपको बताने जा रहे हैं जिसे सुनकर आप भी हैरान हो जाएंगे. जी हां ये कहानी है सिपाही हरभजन सिंह की जिन्हे शहीद हुए करीब 50 साल हो चुके हैं लेकिन लोगों का मानना है कि ये आज भी सिक्किम सीमा पर हमारे देश की सुरक्षा कर रहे हैं. हुई न हैरानी, लेकिन भारतीय सैनिकों के अनुसार ये एक बड़ा सच है. और यही कारण है कि आज भी भारतीय सेना उनके मंदिर का रखरखाव करती है और उनके मंदिर में पूजा-पाठ की जिम्मेदारी भी सेना के जिम्मे है.

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बाबा हरभजन सिंह मंदिर के बारे में वहां तैनात सैनिकों का कहना है कि उनकी आत्मा चीन की तरफ से आने वाले किसी भी खतरे को पहले ही बता देती है. इसके अलावा यदि भारतीय सैनिकों को चीन के सैनिकों का कोई भी मूवमेंट पसंद नहीं आता तो वो चीनी सैनिकों को भी पहले ही बता देते हैं. सिर्फ भारतीय ही नहीं चीनी सैनिकों को भी बाबा हरभजन सिंह पर पूरा यकीन है. इसलिए भारत और चीन के बीच होने वाली हर फ्लैग मीटिंग में बाबा हरभजन सिंह के नाम की खाली कुर्सी लगाई जाती है, ताकि वो मीटिंग अटेंड कर सकें..

अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर कौन है ये हरभजन बाबा और क्यों लोगों को ऐसा लगता है कि उनकी आत्मा हमारे देश की रक्षा कर रही है. तो चलिए आपको बताते हैं कि पूरा मामला है क्या.

दरअसल हरभजन सिंह साल 1966 में 24वीं पंजाब रेजिमेंट में बतौर जवान भर्ती हुए थे. लेकिन सेना को केवल 2 साल की सेवा देने के बाद ही साल 1968 में सिक्किम में तैनाती के दौरान एक हादसे में मारे गए. इस मामले में सेना के जवानों ने बताया कि एक दिन जब वो खच्चर पर बैठ कर नदी पार कर रहे थे, तभी खच्चर सहित हरभजन नदी में बह गए. नदी में बह कर उनका शव काफी आगे निकल गया. ऐसा कहा जाता है कि दो दिन की तलाशी के बावजूद भी जब उनका शव नहीं मिला. तब उन्होंने खुद ही अपने एक साथी सैनिक के सपने में आकर अपनी शव वाली जगह बताई. सुबह उस सैनिक ने अपने साथियों को हरभजन वाले सपने के बारे में बताया और जब सैनिक सपने में बताए जगह पर पहुंचे तो वहां हरभजन का शव पड़ा हुआ था. बाद में पूरे राजकीय सम्मान के साथ हरभजन का अंतिम संस्कार किया गया. हरभजन सिंह के इस चमत्कार के बाद साथी सैनिकों ने उनके बंकर को एक मंदिर का रूप दे दिया. हालांकि बाद में सेना की ओर से उनके लिए एक भव्य मंदिर का निर्माण किया गया, जो की ‘बाबा हरभजन सिंह मंदिर’ के नाम से जाना जाता है. मंदिर में बाबा का एक कमरा भी है, जिसमें हर दिन सफाई करके बिस्तर लगाए जाते हैं. कमरे में बाबा की सेना की वर्दी और जूते रखे जाते हैं. यहां तक कि लोगों का कहना है कि रोज़ सफाई करने के बावजूद उनके जूतों में कीचड़ और चद्दर पर सलवटें पाई जाती हैं.

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और तो औऱ बाबा हरभजन के बारे में वहां तैनात सैनिकों का कहना है कि वो अपनी मौत के बाद भी लगातार अपनी ड्यूटी दे रहे हैं. इनके लिए उन्हें बाकायदा तनख्वाह भी दी जाती है और सेना में उनकी एक रैंक भी है. यही नहीं कुछ साल पहले तक उन्हें दो महीने की छुट्टी पर पंजाब में उनके गांव भी भेजा जाता था. इसके लिए ट्रेन में उनकी सीट रिज़र्व की जाती थी और तीन सैनिकों के साथ उनका सारा सामान गांव भेजा जाता था और फिर दो महीने पूरे होने के बाद वापस सिक्किम लाया जाता था. वहीं कुछ लोगों के द्वारा जब इस पर आपत्ति दर्ज की गई तो सेना ने बाबा को छुट्टी पर भेजना बंद कर दिया. अब बाबा हरभजन साल के बारह महीने अपनी ड्यूटी पर रहते हैं.

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