रामनाथ कोविंद देश के 14वें राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं। ऐसे में वर्तमान और भूतपूर्व राष्ट्रपतियों से जुड़े कई रोचक किस्से चर्चा में हैं। आज बात उस राष्ट्रपति की जिनकी अगले महीने यानी 19 अगस्त को जन्मशताब्दी है। हम बात कर रहे हैं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा की। कांग्रेस अध्यक्ष रहे, गवर्नर रहे, उपराष्ट्रपति बने,  प्रधानमंत्री का पद ठुकराया और फिर देश के राष्ट्रपति बने। राष्ट्रपति बनने के बाद एक दिन ऐसा आया, जिसकी कल्पना शायद शंकर दयाल शर्मा ने भी नहीं की थी। ऐसा क्या हुआ जिससे डॉक्टर शंकर दयाल शर्मा भी सकते में आ गए, जानेंगे लेकिन उससे पहले कैलेंडर की तारीख को जरा पीछे पटलते हैं।

पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा

साल 1985 तारीख 31 जुलाई, जगह थी दिल्ली का कीर्ति नगर, कांग्रेस नेता ललित माकन अपने घर से बाहर निकले और अपनी कार की तरफ बढ़े। अभी कार तक पहुंचते उससे पहले ही तड़ातड़ गोलियों की आवाज सुनाई दी। ललित  माकन खतरा भांपते हुए घर की तरफ भागने की कोशिश करते हैं, गोलियों की आवाज सुनकर उनकी पत्नी गीतांजली और सहयोगी बाल किशन भी बाहर आते हैं। चंद पलों में ही तीनों की खून से लथपथ लाशें जमीन पर गिरी होती हैं। वारदात को अंजाम देकर स्कूटर सवार तीन हमलावर फरार हो चुके होते हैं।

जरुर पढ़ें:  एक नवाब, जो अपने अजीब शौक की वजह से दुनिया में सुर्खियों में रहा
आतंकी सुखदेव सिंह उर्फ सुक्खा

दरअसल ये तीनों हमलावर खालिस्तान कमांडो फोर्स के खूंखार आतंकी जिंदा उर्फ हरजिंदर सिंह, सुखदेव सिंह उर्फ सुक्खा और रंजीत  सिंह गिल उर्फ कुक्की थे। हत्या की वजह 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए दंगे में ललित माकन की भूमिका को बताया जाता है। तीनों आतंकियों में से जिंदा और सुक्खा वो कुख्यात चेहरे थे, जिसने पुणे में आर्मी जनरल अरूण वैद्य की हत्या की थी। ये वही जनरल अरुण वैद्य थे जो ऑपरेशन ब्लू स्टार के समय सेना के मुखिया थे। बहरहाल इस बीच 1986 में आतंकी सुक्खा पकड़ा गया और अगले ही साल 1987 में जिंदा भी पकड़ा गया।आतंकवादियों को फांसी की सजा सुना दी गई।

जरुर पढ़ें:  इसलिए नए राष्ट्रपति को प्रणब मुखर्जी से मिलेगी ज्यादा तनख्वाह
आतंकी रंजीत सिंह गिल उर्फ कुक्की

इस बीच 25 जुलाई 1992 को देश के 9वें राष्ट्रपति के रुप में डॉक्टर शंकर दयाल शर्मा शपथ ले चुके थे। सुक्खा और जिंदा की मर्सी पिटीशन अब नए राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा के पास आ चुकी थी। इन आतंकियों की जिंदगी का फैसला अब डॉ. शंकर दयाल शर्मा के हाथ में था। लेकिन ये फैसला डॉ. शंकर दयाल शर्मा के लिए बेहद कठिन था। क्योंकि ये आतंकी सिर्फ सेना के जनरल वैद्य के ही हत्यारे नहीं थे, बल्कि शंकर दयाल शर्मा के बेटी और दामाद के हत्यारे भी थे। जी हां 31 जुलाई 1985 को जिन ललित माकन और गीतांजली की आंतकियों ने हत्या की थी, वो डॉ शंकर दयाल शर्मा के बेटी और दामाद थे।

जरुर पढ़ें:  जिन्हें राष्ट्रपति के घर में जाने से रोका था, अब वहीं बनने जा रहे हैं राष्ट्रपति !
संजय गांधी के साथ ललित माकन

राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने दया याचिका को ठुकरा दिया और 9 अक्टूबर 1992 को सुक्खा और जिंदा को पुणे की यरववदा जेल में फांसी दे दी गई। इस हत्याकांड में वांछित तीसरा आतंकी रंजीत सिंह गिल भी 1987 में इंटरपोल की मदद से अमेरिका में पकड़ लिया गया था। लंबी जद्दोजहद के बाद साल 2000 में रंजीत सिंह गिल उर्फ कुक्की को भारत प्रत्यर्पित कर के लाया गया। कुक्की को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई हालांकि 2009 में वो जेल से रिहा हो गया।

पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा