लैला-मजनूं, हीर-रांझा, रोमियो-जूलिएट ऐसे कुछ नाम हैं, जो प्यार के नाम पर अपनी जान देकर पूरी दुनिया की किताबों में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं। इन प्यार करने वालों की मिसाल तो आप दुनिया के हर दीवाने से सुन लेंगे, पर इस दुनिया में दोस्ती के नाम पर जान देने वाले लोग बहुत ही कम होते हैं। ऐसे लोग जो अप्पने दोस्त की एक बात को अपनी जिन्दगी का अहम हिस्सा बना ले।

रामपाल प्रजापति पानी पिलाते हुए

दोस्ती की ऐसी ही मिसाल का नाम है, मध्यप्रदेश के जावदेश्वर गांव के 68 साल के रामपाल प्रजापति। रामपाल प्रजापति अपने गांव से 20 किलोमीटर दूर पाली हाईवे पर बाल्टी में पानी लेकर सर्दी, गर्मी या बरसात हरदम मौजूद रहते हैं। जैसे ही कोई बस या दूसरा वाहन रुकता है वो बाल्टी और लौटे में पानी लेकर बस की खिड़कियों के पास पहुंच जाते हैं।

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रामपाल प्रजापति

पैदल हो या बाइक से गुजर रहा राहगीर हर किसी को रामपाल पानी के लिए जरूर पूछते हैं। पिछले 22 साल से रामपाल प्यासाें को पानी पिलाने का काम कर रहे हैं। वो भी बिना किसी स्वार्थ के। रामपाल प्रजापति का एक दोस्त था वासुदेव वैष्णव जो उसी हाईवे पर लोगों को पानी पिलाने का काम करता था। कई साल तक वासुदेव यही काम करता रहा जब उसने दम तोड़ा तो रामपाल से कहा कि प्सासे को पानी पिलाने से बड़ा कोई पुण्य नहीं। अगर तुम ये कर पाओ तो जरूर करना। पैसा नहीं आत्मा को सुकून इतना मिलेगा कि किसी भी चीज की चाह नहीं रहेगी। दोस्त के इन अंतिम बोलों को अब रामपाल अपनी जिंदगी का मकसद बनाकर जी रहा है।

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रामपाल जी के लिए किसी शायर ने क्या खूब कहा है – ऐ यार सुन यारी तेरी, मुझे ज़िन्दगी की हर ख़ुशी से भी प्यारी है।

अपने दोस्त  की कही हुई आखिरी बात रामपाल प्रजापति बड़ी ही शिद्दत से निभा रहा है, जिसे सुनकर आपकी आंखें नम हो सकती है और आपका दिल पसीज सकता है।

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