नवाब और उनके शौक, दोनों ही उस दौर में मशहूर थे। इसलिए आज भी लोग ये कहते मिल जाएंगे, कि ‘नवाबों वाले शौक मत पालो’। वैसे उस दौर में नवाबों के शौक कुछ इस तरह के होते थे, कि आज के दौर में उनपर हँसी छूटना लाज़िमी है। कोई कुत्तों का शौकिन था, तो कोई आदमियों का! उस दौर के नवाबों ने अपने शौक से ही इतिहास के पन्नों पर जगह पाई है, और उन्हें उनको शौकों की वजह से ही हम याद भी करते हैं। किस्सा कहानी में आज बात ऐसे ही नवाब की जिनका शौक माशाअल्लाह था।

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आज की भागमभाग वाली जिंदगी में वक्त किसके पास है। तभी तो कई लोग कुछ कामों को टॉयलेट में ही निपटा लेते हैं। सुनने में अजीब लगेगा, लेकिन टॉयलेट में न्यूजपेपर को निपटाना आम है। हम सोचते हैं, पहले जमाने में लोगो के पास खासा वक्त हुआ करता था। लेकिन ऐसा सोचना शायद गलत है। वक्त की कीमत हमेशा रही है। वक्त की कीमत से ही जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा रामपुर रियासत का है।

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यूं तो रियासत के कामकाज और मंत्रियों की बैठक महलों के आलीशान दरबार में हुआ करते थे। महाराजा या फिर नवाब ऊंचे सिंहासन पर विराजमान होकर नीचे बैठे मंत्रियों से राजकाज के संबंध में मंत्रणा करते थे। लेकिन रामपुर में रियासत के कामकाज पर चर्चा और मंत्रियों की बैठक (आज के दौर के हिसाब से कैबिनेट मीटिंग) किसी भव्य दरबार में नहीं बल्कि संडास (टॉयलेट) के पास हुआ करती थी। जहां नवाब किसी सिंहासन पर नहीं बल्कि टॉयलेट में बैठकर अपना और रियासत का काम साथ-साथ निपटाया करते थे।

रामपुर के नवाब हामिद अली खां (31 अगस्त 1875-20 जून 1930)

सुनने में आपको भले अजीब लगे, लेकिन रामपुर (उत्तरप्रदेश) के तत्कालीन नवाब हामिद अली खां बहादुर के काम करने का तरीका कुछ ऐसा ही था। रियासत के कुछ जरूरी काम डेली बेसिस पर रोज निपटाने होते थे, लिहाजा हामिद अली खां बहादुर वक्त ज़ाया न करते हुए टॉयलेट में ही बैठे-बैठे रियासत के कई काम निपटा दिया करते थे। नवाब साहब का डेली रूटीन था, कि वो सुबह 2 घंटे और शाम को 2 घंटे टॉयलेट में बैठकर कैबिनेट को ब्रीफ किया करते थे।

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नवाब के ये टॉयलेट भी कोई साधारण टॉयलेट नहीं थे। इसे रियासत के चीफ इंजीनियर ने बकायदा बैठक के हिसाब से ही तैयार किया था। इसे एक ऊंचे चबूतरे पर इस तरह डिजाइन किया गया था, जहां से नवाब साहब सभी को देख सके और नवाब साहब किसी को नजर न आए। यहां नवाब साहब बड़े आराम से हाज़त रफ़ा (शौच) किया करते थे और और हर काम में अपना निर्णय सुनाया करते थे। हफ्ते में दो दिन नवाब हामीद अली खां बहादुर ऐसी कैबिनेट मीटिंग बुलाया करते थे।

नवाब हामिद अली खां

आज टॉयलेट में न्यूजपेपर और लैपटाप या आईपैड लेकर बैठने वाले इस गफलत में न रहे, कि उनकी लाइफ बहुत बिजी है। पहले जमाने में भी लोगों पर काम का खासा बोझ हुआ करता था। और इसके लिए वो टॉयलेट का इस्तेमाल किया करते थे।

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