#Me Too मूमेंट इस वक्त देश में तेजी से वायरल हो रहा है। अभिनेत्री समेत देश भर से कई सारी महिलाएं इस मूवमेंट के तहत अपने साथ हुई शोषण की घटनाओं को सामने ला रही हैं. रोजाना सेक्शुअल हैरसमेंट के नए-नए आरोप सामने आ रहे हैं. बता दें  #Me Too मूमेंट के बाद #Men Too कैंपेन की भी शुरुआत हुई. इस कैंपेन की शुरुआत पंद्रह लोगों के एक ग्रुप ने की है. जिसमें उन्होंने पुरुषों से कहा है, कि वे महिलाओं के हाथों अपने यौन शोषण के बारे में खुलकर बोलें. इन पंद्रह लोगों में फ्रांस के पूर्व राजनयिक पास्कल मजूरियर भी शामिल हैं.

#MenTooCampaign की शुरूआत

ये दोनों ही कैंपेन महिलाओं और पुरुषों को एक दूसरे के खिलाफ खड़ा कर रहे हैं. लेकिन इस शोर और मतभेद के बीच बरेली से आई-टू मूवमेंट शुरू हुआ है. आई-टू मूवमेंट के तहत पुरुष-महिला के रिश्ते को मजबूती देने की कोशिश की जा रही है. जी हाँ ये मूवमेंट  पुरुष-महिला को करीब लाना चाहता है.

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#IToo Campaign की शुरूआत

इस मूवमेंट के तहत  लोग महिलाओं का सहयोग करते हुए फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं. बता दें जीआईसी में उप प्रधानाचार्य डॉ. अवनीश यादव ने इसकी शुरुआत की है। देश-विदेश में इस समय मी-टू मूवमेंट की चर्चा है. जाने माने सेलिब्रिटी  इस मूवमेंट का शिकार हो रहे हैं. बीसीसीआई के सीईओ बरेली के ही रहने वाले राहुल जौहरी पर भी शोषण का आरोप लग चुका है.

जबकि बरेली की गायिका वर्षा सिंह ने गायक कैलाश खैर और संगीतकार तोशी को कटघरे में खड़ा कर डाला. मी-टू के वायरल होने बाद जीआईसी में उप प्रधानाचार्य डॉ. अवनीश यादव ने आई-टू अभियान शुरू किया है. बता दें डॉ. अवनीश ने सोशल मीडिया पर किचन वर्क में पत्नी का हाथ बटाते हुए एक तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की है. उन्होंने दूसरे लोगों से भी अपनी पत्नी, मां, बहन, कलीग सभी का सहयोग करने की अपील की है.

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डॉ. अवनीश यादव

डॉ. अवनीशका मानना है कि मी-टू अभियान का वो पूरा सपोर्ट करते हैं. जिसने भी गलत काम किया हो उसको सजा मिलनी चाहिए. मगर आई-टू अभियान का अपना एक अलग मकसद है. ये घर के कामकाज में पुरुषों का सहयोग न होने के खिलाफ एक पहल ह. बता दें इस रवैये को पितृसत्तात्मक रवैये भी कहा जाता है. जिसके मुताबिक परिवार में पिता या अन्य पुरुष महिलाओं और बच्चों के ऊपर अधिकार जमाते है. स्त्री और  पुरुष को समाज की ओर से बनाए गए नियमों के मुताबिक चलना पड़ता है.

डॉ. अवनीश ने  बताया, कि घर के काम काज जैसे झाडू पोंछा, जूठे बर्तन साफ करना, वाशरूम साफ करना जैसे तमाम काम महिलाओं के ही जिम्मे कर दिए जाते हैं. आखिर ऐसा क्यों? मेरी लोगों से अपील है कि वो इस तरह के कामों में महिलाओं का सहयोग करें और गर्व के साथ उसके फोटो एफबी पर पोस्ट करें. हमको अपने आफिस में भी महिलाओं के साथ इसी तरह से सहयोग करना चाहिए.

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डॉ. अवनीश यादव

साथ ही अविनाश के कहना है, कि पुरुष के कारण किसी भी महिला को कोई दिक्कत हुई हो तो उसके लिए उसे खुद माफी मांगनी चाहिए. आई-टू अभियान के तहत लोग कन्फेशन भी कर सकते हैं. अगर कन्फेशन की हिम्मत नहीं है तो उस महिला से व्यक्तिगत तौर पर मिलकर माफी मांग सकते हैं.

आप सभी लोगो के लिए डॉक्टर अविनाश ने एक मैसेज भी दिया है और वो मैसेज है- आपके आसपास कोई व्यक्ति महिलाओं के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करता है तो हमारी जिम्मेदारी है कि उसको टोकें. बार बार टोकने पर बदलाव जरूर नजर आएगा. बदलाव न आये तो ऐसे व्यक्ति का सामाजिक बहिष्कार करें. तो सुना अपने बदलाव लाना है तो पहल करनी पड़ेगी.

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