सावन के पावन महीने में एक ओर जहां कांवड़ के नजारे माहौल बना देते हैं तो वहीं त्योहारों की धूम भी खुशी को दुगना कर देती है. खास कर कि बात करें सावन के सबसे खास त्योहार रक्षा बंधन की. जिसका हर बहन को बेसब्री से इंतजार होता है. बाजर सजते हैं और तरह तरह की राखियां देखने को मिलती हैं. कही चाइनीज तो कहीं इंडिया की सादगी से बनी राखियां. अब जैसा कि आपको मालूम ही है कि हर साल की तरह इस साल भी रक्षा बंधन आने वाला है. बाजार भी एक बार फिर सज चुके है और तरह तरह की राखियां मिलनी भी शुरू हो गई हैं. लेकिन इस बार कुछ राखियां ऐसी भी हैं जो शायद ही आपने पहले कभी देखी हों और शायद ही आपने इनकी कल्पना भी की हो.

जरुर पढ़ें:  गुजरात से यूपी और बिहार के लोगों को कौन भगा रहा है, देखिए ये विडियो..

जी हां, दोस्तों आपने ईको फ्रेंडली दीवाली के बारे में तो सुना ही होगा,, यहां तक कि ईको फ्रेंडली होली भी देखी और सुनी होगी. लेकिन क्या आपने कभी ईको फ्रेंडली रक्षा बंधन देखा या सुना है. अगर नहीं तो हम आपको बता दें कि इस बार का रक्षा बंधन ईको फ्रेंडली होने वाला है. पर वो कैसे, ये आप इन तस्वीरों को देखकर जान लीजिए….

दरअसल जो राखियां आप इन तस्वीरों में देख रहे हैं वो गोबर से बनाई गई हैं. यहीं वजह है कि इनको ईको-फ्रेंडली कहा गया है. आपको बता दें कि ये राखियां उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में स्थित श्री कृष्ण गौशाला में बनाई जा रही हैं. खबरों की मानें तो श्री कृष्ण गौशाला में देसी नस्ल की लाल सिंधी गाय है. जिनके गोबर को राखी का आकार देकर सुखाया जाता है. इसके बाद उन्हें सजा कर उनमें सूत के धागे बांधे जाते है. ताकि बहने अपने भाई की कलाई पर इन्हें बांध सकें.

जरुर पढ़ें:  इन जॉब्स में पैसा ही पैसा है, बस करने के लिए कलेजा चाहिए

अब जैसा कि हमने आपको बताया कि इन राखियों को गोबर से बनाया गया है, जिससे पर्यावरण  को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा. और कुछ दिन पहनने के बाद आप इसे जमीन में भी जबा सकते हैं. जिससे जमीन की उर्वरकता बढ़ेगी.

आपको बता दें कि गोबर से ईको फ्रेंडली राखी बनाने का ये आईडिया 52 साल की अल्का लोठी का है. जो कि इंडोनेसिया से नौकरी छोड़कर भारत लौंटी है. यहां उन्होने बिजनौर में स्थित अपने पिता की गैशाला देखी तो उनके मन में ईको-फ्रेंडली राखी बनाने का आईडिया आया.

 

 

Loading...

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here