विदेशों का रहन-सहन और कल्चर इंडिया से बेहद अलग है। पश्चिम में लोग बेहद खुले विचारों वाले हैं, वहां सेक्स जैसे विषयों पर भी पर भी खुलकर बातें होती है। वहां का पहनावा हमसे बेहद अलग है, यहां लड़की घुटनों तक कपड़े पहने लें तो लोग घूरने लग जाते हैं, लेकिन वहां कपड़े के नाम पर तन पर उतना ही होता है, जिससे कि इज्जत छिपी रह सकें। लेकिन इसी आजादी का वहां किस तरह से बेजा इस्तेमाल होता है और आधुनिकता के नाम पर कैसी अश्लीलता होती है, ये हम कई बार देख चुके हैं। 

Woodstock festival in Polandये तस्वीर पॉलेंड में मनाए जाने वाले त्योहार की है, आपको लग रहा होगा, हमारे यहां भी तो होली ऐसी ही खेली जाती है, दही हांडी के कार्यक्रम में भी ऐसी ही भीड़ उड़ती है और ऐसे ही पानी की बौछार के बीच मस्ती के साथ दहीहांडी फोड़ी जाती है। सही सोच रहे हैं आप, लेकिन यहां मस्ती के नाम पर जो अश्लीलता हो रही है, उसे देखकर आपके होश उड़ जाएंगे। आप कहेंगे ये मस्ती है या बेशर्मी ? लेकिन उनके लिए ये मस्ती ही है।

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Image curtsy The Sunआपने टमाटर से खेले जाने वाले फेस्टिवल के बारे में सुना होगा, जिसमें लोग एक दूसरे पर टमाटर मारकर फेंकते हैं। इस फेस्टिवल को बॉलीवुड की फिल्म ‘जिन्दगी ना मिलेगी दुबारा’ में फिल्माया गया था। लेकिन इससे भी ज्यादा घिन आने वाला फेस्टिवल है  “Woodstock Festival” । इस फेस्टिवल के बारे में सुनकर आप कहेंगे, कि ये कोई फेस्टिवल या बेशर्मी का उत्सव?

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ये फेस्टिवल बीते गुरूवार को पॉलेंड में मनाया गया, जिसमें ना तो टमाटर फेंके गए और ना ही कोई रेन पार्टी मनाई जा रही है, बल्कि कीचड़ के पानी में मस्ती या यूं कहे अश्लीलता कर त्यौहार मनाया जा रहा था।

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किसी के शरीर पर कपड़े नहीं है, तो कोई कीचड़ में अश्लील हरकतों में लगा हुआ है, कई लड़कियां बिकनी में लड़कों के शऱीर पर लेट गई है। हर तरफ ऐसा नज़ारा है मानो सेल लगी हो और लूट सको तो लूट लो।

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‘वुडस्टोक फेस्टिवल’ को यूरोप के पौलेंड में हर साल आयोजित किया जाता है। इस फेस्टिवल में सभी के लिए फ्री एंट्री होती है। जिसमें कोई भी जा सकता है, किसी के आऩे-जाने पर बंदिश नहीं होती।

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इस आयोजन में रॉक बैंड भी शामिल होता है, ताकी लोग म्यूजिक की धुन पर मस्ती कर सके। इस फेस्टीवल को शुरू करने के पीछे मकसद शांति, फ्रेंडशिप और प्यार को बढ़ावा देना है।

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इस फेस्टीवल में कई लोग न्यूड होकर शामिल होते हैं। और कई सेमी न्यूड़, और इसी हाल में वो मस्ती में डूब जाते हैं। लोग एक दूसरे के ऊपर कीचड़ फेंकते हैं, कोई कीचड़ में लोगों को फेंकता है, और कोई इस बदतमीजी के नाम पर शिकायत नहीं कर सकता।

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गंदे पानी में नहाना इस फेस्टिवल में एक रिवाज़ की तरह होता है, जिसे हर शख्स पूरी तरह से एन्जॉय करता है। इस फेस्टिवल में फुटबॉल टूर्नामेंट भी खेला जाता है।

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‘द सन’ की खबर के मुताबिक  ‘वुडस्टोक फेस्टीवल’ इस साल ‘कोस्ट्रिज़िन नाड’ ओड़्रा में मनाया गया था, जो जर्मन बॉर्डर के बेहद करीब था। खतरा होने की वजह से गृह मंत्रालय ने कडे सुरक्षा के इंतजाम किए थे।

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ये फेस्टिवल तीन दिन तक मनाया गया था, जिसका शांति यानी पीस को प्रमोट करना मुख्य उद्येश था। इस फेस्टिवल में राजनीतिक जगत से जुड़े कई लोगों ने हिस्सा लिया था।

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बंदिशों और कड़े रिवाजों को मानने वाले मुस्लिम समाज के लोग भी इस फेस्टीवल में शामिल हुए और उन्होंने भी इस त्योहार का खूब लुत्फ उठाया।

वुडस्टोक फेस्टिवम में खेला गया फुटबॉल

भले ही पौलेंड मे ये फेस्टिवल शांति के मकसद से मनाया जाता हो, लेकिन ऐसी बेशर्मी दिखाकर और अशांति के साथ सेलिब्रेट किए जाने वाले में फेस्टिवल से शांति को कैसे प्रमोट किया जा सकता है? इस बात को तो, विदेशी ही समझ सकते हैं।

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