भारत में लड़िकयां छोटे कपड़े पहनकर सड़कों पर निकले तो लोगों का रिएक्शन देखने लायक होता है। कुछ का तो इतना भयंकर होता है, कि मानो वो लड़की को खा ही जाएंगे। ये हम शहरों की बात कर रहे हैं। वहीं अगर लड़की गांव में इस तरह के कपड़े पहन लें, तो फिर उसे कैरेक्टरलेस, बेशर्म और न जाने क्या-क्या कहा जाता है। गांव में लड़कियां घुटने से ऊपर कपड़े पहनने के बारे में तो सोच भी नहीं सकती। लेकिन इसी दश में एक गांव ऐसा भी है, जहां घर के लोग ही लड़कियों बिना कपड़ों के घर से बाहर निकलने को मजबूर करते हैं। और उन्हें  निर्वस्त्र कर शाम के वक्त घर से बाहर भेजा जाता है।

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एक ऐसा समाज जहां लड़की के साथ आज भी दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता है, उसे घर की चारदीवारी में बंद रहने और घर तक सीमीत रखने की बात की जाती हो, वहां इस तरह की ख़बर आपको चौंका सकती है, लेकिन ये सच है। इसी देश के एक राज्य के हिस्से में ये होता है। घर के लोग, बड़े बुजुर्ग घर की इज्जत को बिना कपड़ों के घर से बाहर भेजते हैं। ये सब होता है बिहार में, जहां लड़कियां रात के अंधेरे में न्यूड होकर घर से बाहर निकलती हैं। इसके पीछे एक वजह भी है, और वो वजह आप सुनेंगे तो यकीनन अपना सिर पकड़कर बैठ जाएंगे या यूं कहे, कि आप समाज को कोसने लगेंगे।

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बिहार में ये सब परंपरा के नाम पर होता है। सदियों पुरानी चली आ रही परंपरा या कहे कि अंधविश्वास के नाम पर लोग अपने घर की इज्जत को नग्न कर घर से बाहर भेजते हैं। दरअसल बिहार के कुछ गांवों के लोगों का मानना है, कि जब बारिश नहीं होती, तो भगवान रूठ जाते हैं। इसलिए गांव में बारिश हो इसलिए ऐसा करने के लिए लड़कियों को मजबूर  किया जाता है। इसके पीछे दिया जाने वाला तर्क इतना घिनौना है, कि आपको भी शर्म आ जाए। गांव वालों का मानना है, कि जब सूरज डूबते ही गांव की लड़कियां अपने सारे कपडे उतारकर घर से बाहर निकलेगी, तो उन्हें ऐसा देखकर देवताओं को शर्म आएगी और वे शर्मिंदा होकर गांव में बारिश करा देंगे।

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समाज की इस हिप्रोक्रेसी को आप समझ सकते हैं, रिती रिवाज और अंधविश्वास के नाम पर गांव की लड़कियों को नग्न कर घुमाना लोगों को मंजूर है, लेकिन जब वहीं लड़की अपनी मर्जी से थोड़े छोटे कपड़े पहनकर सड़क पर निकल जाए तो उनके लिए बात संस्कारों और संस्कृति की आ जाती है।

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