बाल कहें केश या फिर हेयर, इंसान की खूबसूरती में चार चांद लगाने वाले ये बाल सिर्फ सिर पर रहने तक ही कीमती नहीं है बल्कि सिर से उतरने के बाद ये ज्यादा कीमती हो जाते हैं। आपको शायद ही ये पता हो कि, बालों का बिजनेस भी किया जाता है। भारत जैसे देश में ज्यादातर बाल मन्नते पूरी होने पर मंदिरों में उतरवाएं जाते हैं, लेकिन क्या कभी आपने सोचा है, जो आप मन्नत में बाल उतारते हैं, उनका क्या किया जाता है ?

मंदिरों में चढ़ाए हुए बाल, सैलून में कटवाएं बाल, सभी तरह के बालों का विदेशों मे बिजनेस किया जाता है और सबसे ज़्यादा बाल भारत के मंदिरों से लिए जाते हैं। बालों के बिज़नेस को ब्लैक गोल्ड भी कहा जाता है। दरअसल बालों के बिजनेस से सबसे ज़्यादा पैसा कमाया जाता हैं, इसीलिए इसे ब्लैक गोल्डन के नाम से पुकारा जाता है। जिन पुरुष, महिलाओं और बच्चों के बालों को हम कचरे का ढ़ेर समझ कर फेंक देते हैं, उन्हीं बालों से कारोबारी लाखों-करोड़ों रुपए बनाते हैं।

मन्दिर है सबसे बड़ा सोर्स

बालों की आवक का सबसे बड़ा केंद्र मंदिर हैं। भारत के दक्षिण में सबसे ज़्यादा बालों को मंदिरों मे चढ़ाया जाता है। जहां औरतें मन्नत पूरी होने पर अपने बाल भगवान को अर्पण कर देती हैं, उन्ही बालों को विदेशों मे बेचा जाता हैं। दक्षिण भारत के तिरुपति व तिरुमाला जैसे मंदिरों से 2014-15 में लगभग 100 करोड के बाल बेचे गए। बाल पूरी दुनिया में एक्सपोर्ट होते हैं लेकिन अकेले ब्रिटेन में हर साल करीब साढ़े चार करोड़ टन बालों का आयात किया जाता है ताकि उसके गंजे नागरिकों के सिर पर बाल नजर आ सकें।

  • अफ्रीकन महिलाओं में है ज़्यादा डिमांड

लड़कियों के लिए बाल उनकी सुन्दरता है। इसी चाहत में अफ्रीका की महिलाओं में इन बालों की ज़्यादा डिमांड देखी जा रही हैं। जहां महिलाए इन बालों के लिए दोगुना पैसा देने के लिए तैयार है। एक स्‍टडीज में खुलासा हुआ है कि अफ्रीका में सूखे बालों का बाजार काफी तेजी से बढ़ रहा है। यहां औसतन 6 बिलियन डॉलर का बिजनस किया जाता है।

  • वर्जिन हेयर की डिमांड ज़्यादा

मन्नत के लिए कटे बालों को वर्जिन हेयर कहा जाता हैं। क्योकि इन बालो में महिलाएं अपने बालों को सुंदर बनाने के लिए शैम्पू को यूज़ नहीं करती है। हालांकि यह बाल काले रंग के हैं लेकिन इन्‍हें फैक्‍ट्री में ले जाकर ब्‍लीच किया जाएगा और अंग्रेजों की डिमांड के अनुसार इन्‍हें डिफरेंट शेड्स दिए जाते हैं। एक बार इन्‍हें कलेक्‍ट कर लिया जाए उसके बाद इन्‍हें ट्रकों और विमानों में लादकर फैक्ट्रियों में भेजा जाता है। इनका ट्रांसपोर्टेशन काफी गुप्‍त रखा जाता है साथ ही फैक्ट्रियां भी इन बालों यानी ब्‍लैक गोल्‍ड को लेकर सतर्क होती हैं।

  • डबल होते है रेट

अंग्रेजों के लिए सुनहरें बालों के लिए इन्‍हें ओस्‍मोसिस बाथ दी जाती है। इससे बालों का काला रंग निकल जाता है और वो गोरे हो जाते हैं। इसमें बालों की चमक बनी रहती है। इसके बाद यह बाजार में किलो के भाव से बजे जाते हैं। यहां से यह पैक कर वितरण के लिए तैयार किए जाते हैं। यहीं से असली पैसा कमाना शुरू होता है। बाजार से यह बाल जब सलून में पहुंचते हैं तो सलून वाले इनकी दूगनी कीमत लेते हैं। 100 पाउंड में खरीदे गए 50 एक्‍सटेंशन की यह सलून डबल कीमत लेते हैं। होली से पहले दो हजार रुपए तक भी भाव पहुंच जाता है, क्योंकि कलरफुल विग की डिमांड बढ़ जाती है।

  • ऐसे किया जाता है बालो का बिजनस

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बालों के बाजार में उम्र का भी खासा महत्‍व है। जैसे कि उदाहरण के तौर पर अगर कोई 24 साल का है तो उसके बाल सबसे बेहतर क्‍वालिटी के माने जाएंगे क्‍योंकि इनमें केरेटिन सबसे स्‍वस्‍थ्‍य होता है। बालों को लेकर इतनी मांग है कि इन्‍हें घर-घर जाकर ढूंढा जता है। मसलन एक महिला के दिनभर में औसत 50-100 बाल गिर जाते हैं और व्‍यापारी इन्‍हें भी जाया नहीं होने देते। एशिया, पूर्वी यूरो और दक्षिण अमेरिका में पेडलर्स घर-घर जाकर इन गिरे हुए बालों को कलेक्‍ट करते हैं। केवल एशिया में ही इस तरह के करीब 5 लाख लोग सक्रिय हैं। मध्यप्रदेश के बालों की क्वालिटी भी उतनी बेहतर नहीं है। ये रुखे और कमजोर होते हैं। बाजार में गुजरात के बालों की मांग सबसे अधिक है। वहां के बाल मजबूत और चमकदार होते हैं। तिरुपति मंदिर से ही महिलाओं के सबसे अधिक बाल आते हैं।

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