हमारे यहां अगर बच्चा रोना शुरु कर दें, तो सभी घरवाले एक मिशन की तरह उसे बच्चे को चुप कराने में जुट जाते है। लेकिन कई देश में बच्चों को रुलाने की प्रथाएं बनाई हुई है। जी हां, एक ऐसी ही प्रथा जापान देश में बनी हुई है

Japan Tradition

दरअसल, जापान में ‘नामसूमो’ नाम का एक त्यौहार मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है, कि त्यौहार के इन दिनों में बच्चे के भविष्य को सुनहरा बनाया जाता है। इस त्यौहार पर लोग एक बड़ा सा कुश्ती का मैदान बनाते है और अपने नन्हे-मुन्ने बच्चों को सूमो पहलवान के पास छोड़ देते है

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जिसके बाद सूमो उन बच्चों को रुलाना शुरु कर देता है। हालांकि कुछ बच्चे तो सूमो के पास जाते ही रोने लग जाते है और कुछ बच्चे ऐसे होते है. जिन्हे सूमो को रुलाने के लिए महनत करनी पड़ती है। बता दें, सूमो के साथ रेफरी भी होते है जो बच्चों को रुलाने में मदद करते है। इतना ही नहीं, इसके लिए पेरेंट्स को 70 पाउंड यानी 6500 हजार रुपए भी खर्च करने पड़ते है।

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आपको बता दे, कि इस प्रथा को मनाने के पिछे ये मान्यता है, कि बच्चों के इस तरह चीखने से बुरी शक्तियों का नाश होता है। बच्चे जितनी जोर-जोर से चीखेंगे-चिल्लाएंगे, बुरी शक्तियां उतनी ही दूर भांगेगी और बच्चों का भविष्या उतना ही सुरक्षित होगा।