गोलगप्पे के पत्ते वाले दोने याद हैं? आप कहेंगे हां, वो पहले मिलते थे। अब तो इसकी जगह प्लास्टिक के दोने ने ले ली है। कभी भंडारा भी इन्हीं पत्तों वाली हरी प्लेट में दिया जाता था। अब उनकी जगह भी प्लास्टिक की डिजायनर थाली ने ले ली है। हम विकसित हो रहे हैं और आधुनिक भी इसलिए देसी और पुरानी चीजों का क्या काम ? लेकिन हमने जिन चीजों को पीछे छोड़ दिया है और जो हमारे लिए पिछड़ेपन की निशानी हैं उन्हीं दोनों और पत्तलों के बलबूते विदेश में कुछ युवा नाम के साथ खूब दाम कमा रहे हैं। 

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प्लास्टिक हमारे शरीर के लिए कितना नुकसानदेह हैं, ये हम सब जानते हैं लेकिन मानते नहीं। इसीलिए हमने ईको फ्रेंडली पत्ते के दोनों और प्लेटों को छोड़कर प्लास्टिक  के अपना लिए हैं। और सिर्फ इसलिए, कि ये दोने थोड़े महंगे होते हैं और प्लास्टिक के सस्ते और अच्छे भी। अब इंडिया भले ही अपने कल्चर को भूल रहा हो, लेकिन विदेशी इसको बढ़ावा दे रहे है। पत्तों से बनी प्लेट और कटोरियों का इस्तेमाल करना शुरु कर रहे हैं। आपको बता दें, कि जर्मनी में कुछ युवाओं ने लीफ रिपब्लिक नाम से एक कंपनी खोली है, ये कंपनी पत्तल और दोने बना रही है।

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लीफ कंपनी जर्मनी में लोगों की बड़ी तेज़ी से पंसद बनती जा रहा है, इस कंपनी में कई ग्रुप में युवा इंजीनियर्स हैं, जो इसकी उपयोगिता और डिजाइन्स पर लगातार काम कर रहे हैं। इस कंपनी के युवा बताते हैं, कि-

‘हमें नेचर से बहेद प्यार है, इस कंपनी के जरिए हम  नैचर से जुडे़ रहते हैं’

इस कंपनी के जरिए काफी लोगों को रोज़गार भी मिल रहा है, इन पत्तलों की सबसे बड़ी खासियत ये है, कि इसे बड़ी आसानी से खत्म किया जा सकता है और इससे धरती को और अधिक उपजाऊ बनाया जा सकता है।

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