भारत में जहां एक तरफ मंदिरों में पूजा-पाठ की जाती है, वही दूसरी और साधू तंत्र-मंत्र भी करते हैं और इस तरह के काम त्यौहारों के दिन खासकर अमावस्या की रात को ज्यादा देखे जाते हैं, वही दिवाली एक ऐसा त्यौहार है, जिसमें अमवस्या की रात होने की वजह से कई साधू मिलकर तंत्र-मंत्र किया करते हैं। इन मंत्रों की सिद्धी के लिए दुनियाभर के तांत्रिक मिलकर मंदिरों में पूजा करते हैं।

Demo Pic- Tantrik pooja

आपको बता दें, कि दिवाली के दिन अमावस्या की आधी रात को सिद्धि के लिए विशेष साधना की जाती है, साधना में जगह और तांत्रिक मठों का काफी महत्व होता है और इस तरह की दिवाली जहां दुनियाभर के साधु मिलकर सिद्धि करते है वो है जबलपुर। जहां के बाजनामठ स्थित तांत्रिक मंदिर में पूजन अलग तरह से ही किया जाता है। इस मंदिर मे हर साल इसी तरह तंत्रों-मंत्रो के साथ दिवाली मनाई जाती है। हर साल आने वाले तांत्रिकों का मानना है, कि इस दिन रात को धन लक्ष्मी धरती पर आती है और उनकी उपासना अलग तरीके से होनी चाहिए। जिसका अलग ही महत्व होता है।

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आधी रात को जगाए जाते हैं तंत्र-मंत्र

इस साधना को बेहद की फलदायक बताया गया है, तभी रात को साधना कर तंत्र-मंत्र जगाते हैं, जबकि वैद्य और आयुर्वेदिक के जानकार औषधियों को जगाते हैं। सिद्धि तांंत्रिक के अनुसार बाजनामठ मंदिर एक ऐसा तांत्रिक मंदिर है, जिसकी हर ईट शुभ नक्षत्र में मंत्रों द्वारा सिद्ध करके बनाई गई है। ऐसे मंदिर पूरे देश में सिर्फ कुल तीन है, जिनमें बाजनामठ और दूसरा काशी, तीसरा महोबा में है। बाजनामठ मंदिर का निर्माण सन् 1520 ईस्वी में राजा संग्राम शाह ने बटुक भैरव मंदिर के नाम से कराया था। कहा जाता है, कि इस मठ के गुंबद में त्रिशूल से निकलने वाली प्रकृतिक ध्वनि-तंरगों से शक्ति जागृत होती है।

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दिवाली की रात लगता है मेला

इस दिन तांत्रिक भैरव को जगाने के लिए कई तरह की बली चढाया करते हैं, जिसमे सिंह, श्र्वान, शूकर, भैंस और चार मानव और ब्राह्मण, क्षत्रिय, वेश्य और शूद्र इस प्रकार नौ प्रणियों की बली चढ़ाते हैं। लेकिन वक्त के साथ बलि प्रथा को अब खत्म कर दिया गया है। वही, बाजनामठ मंदिर के अलावा चौसठयोगिनी मंदिर भी तंत्र साधना के बड़े केन्द्र रहे हैं। दोनों को ही साधना का केंद्र माना जाता है। इन दोनों के अलावा भेड़ाघाट में गोलकीमठ विश्वविद्यालय के तांत्रिक साधना केन्द्र चौसठयोगिनी मंदिर पहुंचते हैं। यहां हर साल दिवाली की रात मेला लगता है।

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