रोटी ,कपड़ा और मकान ये हमारी बुनियादी जरूरतों में शमिल है। हम और आप तो आराम से अपने घरों में रहते हैं लेकिन उनका क्या जिनके सिर पर छत नहीं होती। उनकी जिंदगी तो बस एक होर्डिंग के पीछे सिमट कर रह जाती है। आज हम आपको कुछ ऐसा बताने वाले जिसे देख कर आपको भी तकलीफ होगी। पहले आप नीचे दी गई तस्वीर देख लीजिए।

मेट्रो पिलर के होर्डिंग पर बैठी महिला

तस्वीर में आप एक महिला को देख रहे है जो मेट्रो पिलर पर लगे एक होर्डिंग के पीछे जाने की कोशिश कर रही है। होर्डिंग तक जाने के लिए कोई रास्ता भी नहीं है लेकिन महिला का साहस तो देखिए कि पिलर पर लिपटी इन तारों को ही ये सीढी बना लेती है। ये सच्चाई है उन गरीबों की जिनके पास न तो दो वक्त की रोटी है और न ही सिर ढकने के लिए छत। मामला दिल्ली के रोहणी सेक्टर 7 का है जहां पिलर पर लगे होर्डिंग ही बेघरों का आशियाना है।

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मेट्रो पिलर पर चढती महिला

महिला से यहां रहने की वजह पूछे जाने पर उसने बताया कि वो दिनभर अपने भाई-बहनों के साथ फुटपाथ पर समान बेचती है अपना बाकी सामान चोरी होने के डर से वो समान होर्डिंग के पीछे रख देती है। इतना ही नही घर के बच्चों को इन होर्डिंग्स के पीछे सुला भी देती है। कई बार तो वो खुद भी इन लोहे के पाइपों पर आराम फरमा लेती है। महिला से जब शेल्टर होम में न रहने की वजह पूछी गई तब उसने बताया कि रैन बसेरों में सामान चोरी हो जाता है। गंदे कंबल और ऊपर से इंचॉर्ज की डांट फटकार सुनकर वहां तक जाने को दिल नहीं करता। ये कहानी उन तमाम बेघर लोगों की है जिनके लिए शेल्टर होम बनाने का दावा सरकार कर रही है।

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मेट्रो पिलर के होर्डिंग पर बैठी महिला

इस वक्त दिल्ली में 184 रैन बसेरा हैं, जिनमें से 82 स्थायी और 102 अस्थायी है। नेशनल अर्बन लाइवहुड मिशन के तहत बने इन रैन बसेरों में अभी 4890 लोग रह रहे हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के तहत रैन बसेरा में रह रहे हर शख्स को 50 स्कायर फीट की जगह मिलनी चाहिए। वहीं, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) का दावा है कि दिल्ली में बने रैन बसेरा में कुल 14584 लोग रह सकते हैं।यानि इनमें हर शख्स को रहने के लिए सिर्फ 16 फुट की जगह ही मिल पा रही है ऐसे में सवाल ये उठता है कि दिल्ली में ऐसे कितने लोग हैं जो बेघर हैं। क्या उनका आंकड़ा सरकार के पास है? इन बेघर लोगों के लिए सरकार क्या कर रही है? हालांकि प्रधानमंत्री मोदी ने 2022 तक सबको घर देने का वादा किया है तो क्या इन बेघरों को ये घर मिल पाएगा?

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