बॉलीवुड मूवी टेबल नंबर-21 शायद आपने देखी हो और अगर देखी हो तो आपको पता चल गया होगा, कि रैगिंग कितनी खतरनाक हो सकती है और ये आपकी जान तक ले सकती है। दरअसल फिल्म की पूरी कहानी रैंगिग और उससे जुड़े अपराधों पर ही बनी है। इस फिल्म में कुछ छात्र एक बच्चे की पूरी लाइफ खराब कर देते हैं। इसके अलावा बॉलीवुड में दर्जनों ऐसे फिल्में आई जिसने रैंगिग के भयावह रूप को दिखाया। फिल्मों, वीडियो और सोशल साइट के ज़रिए शिक्षा जगत की इस बुराई से तो सब वाकिफ हो जाते हैं, लेकिन ये शायद ही किसी को पता हो, कि रैगिंग नाम की ये बला आई कहां से, सब यही जानते हैं, कि कॉलेज में इंट्रो के नाम पर हंसी मजाक से इसकी शुरूआत हुई है। लेकिन ऐसा नहीं है।

Pic- Table No.21 Movie

कॉलेज और स्कूल में रैंगिग पहले हंसी-मजाक तक सीमित होती थी। जूनियर्स को अपने सीनियर से इंट्रो का मौका मिला करता था। इसे हेजिंग, फेगिंग, बुलिंग, प्लेजिंग औ हॉर्स प्लेइंग के नामों से भी जाना जाता है। लोगों का मानना है, कि रैगिंग स्कूल और कॉलेज में शुरु हुई और वही खत्म हो गई। लेकिन आज रैगिंग के नाम पर आपसी बैर निकालने, जूनियर्स को प्रताड़ित करने जैसे मामले सामने आने लगे हैं। कभी कभी तो ये रैगिंग इतनी खतनाक हो जाती है, कि इसकी वजह से कई बच्चे सुसाइड तक कर लेते हैं, तो कई डिप्रेशन में आ जाते हैं। इसीलिए सुप्रीम कोर्ट ने 2001 में इस पर बैन लगा दिया और कॉलेजों को इसपर रोक को सुनिश्चित करने का आदेश दिया। लेकिन फिर भी ये रैंगिग नाम का भूत कभी-कभी बाहर निकल ही आता है।

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रैगिंग की शुरुआत

कहा जाता है, कि रैगिंग की शुरुआत 7वीं और 8वीं शताब्दी में खेल के रूप में ग्रीस में हुई थी। इस गेम में कुछ नए खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था, तब स्पोर्ट्स स्पीरिट जगाने के लिए रैगिंग का सहारा लिया गया था। सभी जूनियर खिलाडियों में स्पोर्टस स्पीरिट पैदा करने के लिए उन्हें चिढाया गया, उनकी इंसल्ट की गई। इसके बाद इसी रैगिंग के तरीके को सेना ने भी अपनाया, लेकिन बदलते वक्त के साथ रैगिंग का रुप भी बदल गया। जब रैगिंग शिक्षण संस्थानों में पंहुची, तो ये हिंसक होती चली गई और इसके लिए ग्रुप तक बनाए जाने लगे।

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Demo pic- Ragging

18वीं शताब्दी के दौरान कॉलेज में स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन बनाने से रैगिंग का यूरोपीय देशों में प्रचलन शुरु होने लगा। इन ऑर्गेनाइजेशन के नाम अल्फा, फी, बीटा, कपा, एपिसिलोन, डेल्टा जैसे ग्रीक अक्षरों के नाम पर रखे जाने लगे। जिन्हें भाईचारे के रूप में देखा जाने लगा। रैगिंग की वजह से दुनिया में पहली मौत 1873 में हुई, जब न्यूयॉर्क की कॉरनेल यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग से गिरकर एक जूनियर स्टूडेंट की मौत हो गई। रैगिंग प्रथम विश्वयुद्ध के बाद बेहद खतरनाक हो गई।

Demo pic- Ragging

युद्ध से वापस लौटे सैनिकों ने कॉलेजों में एंट्री लेना शुरू कर दिया और रैगिंग की नई तकनीक हैजिंग को बढ़ावा दिया। जिसे उन्होंने मिलिट्री कैंप में सीखा था। हालांकि सैनिकों के इस नए नियम से कॉलेज के आम स्टूडेंट वाकिफ नहीं थे, इसलिए उनके और सैनिकों के बीच लडाई होनी शुरु हो गई। 20वीं सदी के आते-आते पश्चिमी देशों में रैगिंग से जुड़ी हिंसक घटनाएं काफी तेजी होने लगी।

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इंडिया में रैगिंग की शुरुआत

इंडिया में रैगिंग की शुरुआत अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा से शुरु हुई थी। तब भारत आजाद नहीं हुआ था, लेकिन शुरुआत में इंडिया में रैगिंग कुछ अलग ही तरीके से की जाती थी, जो सिर्फ सीनियर और जूनियर के बीच एक दोस्ती बढ़ाने के लिए हल्का-फुल्का मजाक हुआ करता था। जिसमें अपने टैलेंट को दिखाना होता था। लेकिन 90 के दशक तक आते-आते रैगिंग ने एक खतरनाक रुप ले लिया था, जिससे कई बच्चों की मौत होने लगी। 1997 में तमिलनाडु में सबसे ज्यादा रैगिंग के मामले सामने आए थे। अब दुनिया में रैगिंग क्राइम के सबसे ज्यादा मामले श्रीलंका में सामने आते हैं।