नई दिल्ली: समाज में लड़के और लड़कियों को कितनी ही समानता के अधिकार क्यों ना दिए गए हो, लेकिन आज भी ऐसे कई नियम बने हुए जो लड़के और लड़कियों के बीच बटे हुए हैं। ऐसा ही, एक नियम जो महिलाओं के लिए बना हुआ है जहां, आज भी महिलाओं का जाना मना होता है. जी, हां ये जगह श्माशान घाट है, जहां मरे हुए इंसानों का अंतिम संस्कार किया जाता है। एक ऐसी जगह जहां इंसान के मर जाने के बाद उसे वही जला कर, उसकी आत्मा को शांति दी जाती है, लेकिन क्या कभी आपने ये सोचा है की जब किसी मुर्दे को श्मशान में ले जाया जाता है तो केवल पुरुष ही क्यों जाया करते हैं, महिलाएं श्मशान घाट क्यों नहीं जाती हैं? नही, शायद आफने कभी इस बारे में साचा नही होगा,क्सोकि आप इसे हिन्दुस्तानी रीवाज़ की तरह  औरतों के लिए नियम मानते होगें  या कोई विज्ञानिक कारण। लेकिन इसके कारण कुछ ओर है जिस वजह से आज भी महिलाएं श्मशान घाट नही जाती हैं। तो जानिए, इसके कारण…

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पहला कारण, तो ये है कि औरतें काफी स्फोट नेचर होती हैं वे खून खराबा, जलना व भयानक सीन नहीं देख सकती,  इसीलिए औरतों को श्मशान में अंतिम संस्कार के वक्त नहीं ले जाया जाता है।

दूसरा कारण, यह है कि ‘हिंदू रिवाज के हिसाब से जो अंतिम संस्कार करने जाता है उसे गंजा होना पड़ता है, गंजापन औरतों व लड़कियों को नहीं सुहाता, इसलिए औरतों को अंतिम संस्कार में नहीं ले जाया जा सकता है।

 

तीसरा कारण, ये है कि ‘लड़कियां और औरते कठोर दिल की नहीं होती और किसी अपने के मरने के बाद खुद का रोना नही रोक पाती है, और ऐसे में श्मशान घाट पर औरत का रोना मतलब मरे हुए व्यक्ति कि आत्मा को शांति न मिलना, इसलिए भी औरतों को अंतिम संस्कार में शामिल नहीं किया जाता है।

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चौथा कारण, सबसे बड़ा कारण है कि ‘अक्सर अंतिम संस्कार के बाद पूरे घर कि सफाई की जाती है, जिससे कोई भी नकारात्मक शक्ति घर में न रह सके। घर कि साफ सफाई व अन्य काम के लिए औरतों को घर में रोका जाता है।

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