भूत ये शब्द सुनते ही जेहन में डर और खौफ ही पैदा होता है। लेकिन क्या भूत भी रचनात्मक हो सकते हैं ? वो भी कोई ऐसी रचना कर सकते हैं, जिसकी सदियों तक चर्चा हो। ऐसा न तो कभी हमने फिल्मों में देखा और न ही ऐसा किसी उपन्यास में पढ़ा लेकिन भारत देश में कुछ कहानियां और साक्ष अभी भी इस बात की गवाही देते हैं कि भूत भी रचनात्मक हो सकते हैं। वो भी कुछ ऐसी रचना कर सकते हैं, जिसे दुनिया सराहे, जिसकी मुरीद हो जाए।

ककनमठ मंदिर,मुरैना,मध्यप्रदेश

ऊपर लगी तस्वीर एक मंदिर की है, जो हजार साल से भी ज्यादा पुराना है। कहते हैं ये मंदिर सिर्फ एक रात में बनकर तैयार हो गया था। लोग गहरी नींद में सो रहे थे और मंदिर बन रहा था। जब सुबह लोग उठे तो उनकी हैरानी का ठिकाना नहीं था। एक खाली मैदान पर एक भव्य ग्यारह मंजिला मंदिर खड़ा था। ये तो हैरानी की बात थी ही कि, एक रात में ये मंदिर कैसे तैयार हो गया। उससे भी चौंकाने वाली बात ये थी, कि ये बिना चूने और गारे के कैसे बन गया ? इस मंदिर को आप गौर से देखेंगे तो पाएंगे, कि ये मंदिर सिर्फ पत्थरों से बना है। न चूना, न मिट्टी, न सीमेंट, न गारा, सिर्फ पत्थरों से । एक के ऊपर एक तराशे हुए पत्थर रखते गए और मंदिर तैयार हो गया। और आज सालों बाद भी ये मंदिर समय की मार को सहकर ऐसे ही इन रहस्यमयी पत्थरों पर खड़ा है। हज़ार साल से ये रहस्य अनसुलझा ही है कि ये कैसे संभव है कि बिना जोड़ के कोई मंदिर खड़ा हो जाए और हज़ारों वर्षों तक वो ऐसा ही रहे। पुरातत्व विभाग भी इस रहस्य नहीं सुलझा पाया है। इसकी बनावट, इसका निर्माण और इसकी स्थापत्य कला अभी भी एक अबूझ पहेली है।

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अधूरा सा प्रतीत होता ककनमठ मंदिर

जितनी रोमांचक इस मंदिर का रहस्य है, उतनी ही मजेदार है इससे जुड़ी कहानी भी है। इस मंदिर की बनावट ऐसी है, कि ये देखने में अधूरा सा लगता है। मानो कोई जल्दबाजी में इसका निर्माण अधूरा छोड़कर चला गया। मंदिर के तमाम रहस्यों में एक रहस्य इस मंदिर के खंभे भी हैं। कहते हैं इस मंदिर के खंभों को जितनी बार गिना जाता है, हर बार उसकी गिनती अलग-अलग सामने आती है। अगर एक बार गिनने पर खंभों की संख्या 50 आए तो अगली बार निश्चित तौर पर उनकी संख्या एक कम या एक ज्यादा ही आएगी। मंदिर को लेकर कई किस्से-कहानियां भी हैं। कुछ लोग इसे प्रेतों का डेरा बताते हैं, तो कुछ देवी देवताओं का वास, बहरहाल इस मंदिर को अपनी आंखो से देखने के बाद भी ये विश्वास नहीं होता की बिना मिट्टी, सीमेंट और गारे के ये मंदिर एक के उपर एक रखे पत्थरों पर टिका है।

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ये मंदिर मध्यप्रदेश के ग्वालियर से करीब 70 किलोमीटर दूर मुरैना में सिहोनिया के पास बना है। इस मंदिर को ककनमठ के नाम से जाना जाता है। बताते हैं कि कछवाहा वंश के राजा कीर्ति राज के शासनकाल में इस मंदिर का निर्माण हुआ था। लेकिन स्थानीय लोग इस तथ्य को मानने को तैयार नहीं है, उनके लिए तो ये करिश्मा किसी इंसान के बस की बात हो ही नहीं सकता। स्थानीय लोग इस मंदिर को प्रेतों की कलाकारी मानते हैं। इस इलाके में जब आप जाएंगे तो आपको इस मंदिर से जुड़ी ये कहानी सुनने को मिल जाएगी, कि मंदिर को भूतों ने एक ही रात में बना दिया था, लेकिन मंदिर को बनते-बनते सुबह हो गई, लिहाजा निर्माण अधूरा ही छोड़कर भूत भाग गए।

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