नई दिल्ली: आज हम आपको एक ऐसे देश के बारे मे बताने जा रहे है जो एक समय में सबसे गरीब देश हुआ करता था लेकिन आज वही देश अमीर राज्यों की गिनतीयों में आता हैं।जिससे अरबो करोडो का देश माना जाता हैं। 1970 तक ये देश करीब-करीब गुलाम बना रहा। इतना ही नही जीडीपी लिस्ट में आज ये  पहले नबंर पर आता है। आपको बता दे की देश पर अल थानी परिवार ने भी शासन किया था। तब ये ब्रिटेन के प्रोटेक्शन में हुआ करता था। 17 जुलाई 1913 को शेख अब्दुल्ला बिन कासिम अल थानी देश के शासक बने थे। इस देश को मछली और मोती के बिजनेस के लिए जाना  भी जाना जाता था। लेकिन, बिजनेस में भारी गिरावट आई। जिसके बाद यहां गरीबी, भुखमरी और बीमारियां फैल गई थी । इन जानकरियों से शायद आपको पता चल ही गया हो की हम किस देश की बात कर रहे है लेकिन अगर नही पता की ये कौन-सा देश है जो पहले गुलाम रहा था और आज इतना अमीर है तो बता दें की कतर ही एक ऐसा देश है जो पहले के समय में गरीब देश हुआ करता था लेकिन आज ये अरबो-खरबो कमाता है। तो जानिए कैसे ये देश अमीरी के रास्ते तक पहुंचा…

तरक्की की शुरुआत ऑयल

कहा जाता है1939 में दुखन में ऑयल की खोज हुई। हालांकि, सेकंड वर्ल्ड वॉर का समय होने के चलते 1949 तक यहां बहुत धीमी रफ्तार से डेवलपमेंट हुआ। पर 1951 में कतर रोज 46500 बैरल ऑयल निकालने लगा। इसकी कीमत करीब 28 करोड़ रुपए थी। शैल कंपनी ने समुद्र के अलावा और जगहों पर भी ऑयल ढूंढ निकाला। इसके बाद कतर में रोज का ऑयल प्रोडक्शन 233000 बैरल होने लगा।

जरुर पढ़ें:  सोशल मीडिया में इसलिए वायरल हो रहा है ट्रंप के खुले मुंह वाला ये स्विमसूट

 पहला स्कूल और हॉस्पिटल
नए रेवेन्यू सोर्स से कतर के शासक की जेबें भरने लगीं। 1950 में यहां पहला स्कूल, हॉस्पिटल, पावर प्लान्ट और टेलीफोन एक्सचेंज लगाए गए। 1960 के दशक में देश का रेवेन्यू जबरदस्त बढ़ गया। अल थानी परिवार ने देश पर अपनी पकड़ और भी मजबूत कर ली। परिवार ने हर बड़ी सरकारी पोस्ट पर फैमिली मेंबर को ही बैठाया। उन्हें जबरदस्त अलाउंस दिए जाने लगे।

 ब्रिटेन से हुआ आजाद

1971 में कतर आजाद हुआ। ब्रिटेन ने सुएज कनाल से अपनी पूरी सेना हटा ली। 22 फरवरी 1972 को पिता अमीर अहमद इब्न अली को हटाकर खलीफा इब्न हमद खुद शासक बने। उन्होंने रॉयल फैमिली के खर्चों में जबरदस्त कटौती की और लोगों से जुड़े कामों को आगे बढ़ाया। सोशल प्रोग्राम, घर, हेल्थ, एजुकेशन और पेंशन से जुड़े कामों में पैसा लगाया गया।

 गैस भंडार मिलने से हुई और तरक्की

1971 में यहां गैस के भंडार भी मिले, लेकिन पेट्रोल का प्रोडक्शन लगातार होने की वजह से इस भंडार को डेवलप नहीं किया गया। रूस और ईरान के बाद कतर में गैस का सबसे बड़ा भंडार है। कयास लगाए जाते हैं कि कतर का गैस रिजर्व 896 ट्रिलियन क्यूबिक फीट है। 1980 में ऑयल की कीमत गिरने की वजह से जब कतर की इकोनॉमी ठहर गई, तब 1989 में गैस रिजर्व का डेवलपमेंट शुरू किया गया, हालांकि प्रोडक्शन की रफ्तार धीमी थी।

जरुर पढ़ें:  सावधान ! यहां बीवी को 'चुराकर' उससे कर लेते हैं शादी

 कई गैस प्लान्ट्स खोले गए

1995 में शेख हमद बिन खलीफा अल थानी ने अपने पिता अमीर खलीफा बिन अहमद से शासन छीन लिया। शेख हमद ने नए सिरे से इकॉनोमी डेवलप करने के लिए निर्देश दिए। उन्होंने सबसे पहले नेचुरल गैस रिजर्व को जबरदस्त रफ्तार से डेवलप किया। इससे प्रोडक्शन बढ़ा और कतर ने पहली बार लिक्विड नेचुरल गैस का एक्सपोर्ट शुरू किया। इंटरनेशनल कंपनीज की मदद से कतर में 14 लिक्वड गैस प्लांट्स खोले गए।

 अमेरिकी सेना ने दी सिक्योरिटी

1990 के दशक में कतर ने इंटरनेशनल कंपनीज के साथ ऑयल प्रोडक्शन शेयर करना शुरू किया। 1996 में कतर ने बहुत बड़ा अल उदैद एयर बेस तैयार किया। ये बेस अमेरिका की सेना के काम आया। अमेरिकी सेना के साथ करार होने के बाद कतर जबरदस्त सुरक्षित देश हो गया। 1997 में कतर ने जापान और स्पेन के साथ लॉन्ग टर्म एग्रीमेंट्स किए। इनके तहत वो इन देशों को नेचुरल गैस देने लगा। बाद में कतर ने और भी क्लाइंट्स बना लिए।

जरुर पढ़ें:  यहां मिलते हैं, दुनिया के सबसे मंहगे गोलगप्पे, आपने खाये हैं ?

एजुकेशन सिटी और रिसर्च सेंटर

1998 में यहां की सरकार ने एजुकेशन सिटी डेवलप की। इस बड़े कैंपस में अमेरिका की 6 और यूरोप की 2 यूनिवर्सिटी खोली गईं। यहां रिसर्च सेंटर भी खोले गए। 2003 में यहां कतर इंवेस्टमेंट अथॉरिटी (क्यूआईए) बनाई गई। इसका काम ऑयल-गैस से मिली रकम को दूसरे कामों में लगाकर रेवेन्यू बढ़ाना था। क्यूआईए ने बड़े स्तर पर बारक्लेज बैंक, क्रेडिट सूसे, हेरोड्स, पोर्शे, फॉक्सवेगन और पेरिस सेंट जर्मन फुटबॉल टीम में इन्वेस्टमेंट किए। क्यूआईए के जरिए कतर लंदन में सबसे बड़े रियल इस्टेट होल्डर्स में से एक हो गया। वेस्ट यूरोप की ऊंची बिल्डिंग द शार्ड और केनेरी वार्फ एरिया में इन्वेस्ट करने के साथ-साथ कई हिस्सों में कतर ने बिल्डिंग्स खरीदीं।

 फीफा वर्ल्ड कप को होस्ट करने का मौका

2005 में कतर फाइनेंशियल सेंटर बनाया गया। देश के नेताओं को यकीन था कि वो गल्फ देशों में फाइनेंशियल लीडर बन सकता है। 2006 में लिक्विड नेचुरल गैस एक्सपोर्ट करने के मामले में कतर ने इंडोनेशिया को पछाड़ दिया। दिसंबर 2010 में कतर को फीफा वर्ल्ड कप 2022 के लिए चुना गया। कतर ने इस बड़े टूर्नामेंट के लिए 12 स्टेडियम बनाने का वादा किया। ये स्टेडियम खास कूलिंग टेक्नोलॉजी से बनाए जा रहे हैं। कतर ने स्पोर्टिंग हब के रूप में भी अपनी पहचान बना ली है। ये देश कई टूर्नामेंट होस्ट करता है।

 

Loading...