वायरल पड़ताल: मई – जून की छुट्टियों में नहीं देनी होगी स्कूल की फीस ?

गर्मियों का मौसम आ गया है, और शायद गर्मियों का इंतजार रहता है तो सबसे ज्यादा स्कूल के बच्चों को कि कब जल्दी से स्कूल की छुट्टियों हो और वो अपने समर वेकेशन के लिए घर से कही बाहर घूमने जाए लेकिन छुट्टियों से पहले ही बच्चों के साथ साथ पेरेंटस के लिए भी एक अच्छी खबर हैं कोई भी प्राइवेट स्कूल छुट्टियों के दिनों यानी मई जून की फीस नहीं ले सकेगा अगर स्कूल ने मना करने के बाद भी फीस ली तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी जिसके बाद उसकी मान्यता भी रद्द हो सकती है.

जी हां ये हम नहीं कह रहे है सोशल मीडिया पर तमाम ऐसी तस्वीरे वायरल हो रहाी है जिसमें दावा किया जा रहा है कि अब प्राइवेट स्कूल मई – जून की फीस नहीं ले सकेंगे सिर्फ इतना ही नहीं इन पोस्ट में ये दावा किया गया है अगर किसी ने फीस एडवांस में दे दी है तो वापस मांग ले या फिर अगले महीने में एडजस्ट करा ले अगर स्कूल ऐसा नहीं करता है तो पुलिस में शिकायत करें. पुलिस ना सुने तो सीएम विंडो पर शिकायत करने की सलाह दी गई है. शिकायत पर स्कूल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. तस्वीरों में तो ये तक दावा किया जा रहा है कि फीस लेने पर स्कूल की मान्यता तक रद की जा सकती है इस मैसेज को हाईकोर्ट का ऑर्डर बताया जा रहा है।

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क्या वाकई गर्मियों की छुट्टियों में बच्चों की स्कूली फीस नहीं ली जाएगी सोशल मीडिया पर तमाम तरह की वायरल पोस्ट को देखते हुए हुए वीके न्यूज की टीम ने इस खबर की पड़ताल शुरु की तो असलीयत कुछ और ही निकली इस वायरल पोस्ट में हाईकोर्ट के ऑर्डर का दावा किया गया है लेकिन किस हाईकोर्ट का है ये नहीं बताया गया है हमारी टीम ने इस पोस्ट की काफी खोज की लेकिन ऐसा कोई भी ऑर्डर किसी भी कोर्ट का नहीं निकला फिर हमारी नजर वायरल हो रही पोस्ट के केस नंबर पर गई CP D-5812 जिसे हमने गूगल पर सर्च करा तो पाया ये आदेश हाईकोर्ट सिंध, कराची (पाकिस्तान) के चीफ जस्टिस जुल्फिकार अहमद खान का है ये केस शाहरुख शकील खान ने सिंध प्रांत के मुख्य सचिव के खिलाफ दायर किया था, जिसका फैसला 7 अक्टूबर 2016 को सुनाया गया. इस मामले में इससे मिलती-जुलती 8 अन्य याचिकाओं को भी जोड़ा गया था. इस फैसले में चीफ जस्टिस ने छुट्टियों के दौरान फीस न लेने और स्कूलों में फीस बढ़ोतरी की सीमा तय की थी. पाकिस्तान के स्कूल जून-जुलाई में बंद रहते हैं.

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हमारी पड़ताल अभी यही खत्म नहीं हमने एक तस्वीर देखी जो इस खबर को पूरी तरह से सच साबित करने पर याकिन दिला रही थी सीईडी के लेटर हेड पर सरकारी नहीं जो अपराध की जांच करती है बल्कि प्राइवेट CID यानी ‘क्राइम इंटेलीजेंस डिटेक्टिव’.हमने इस संस्थान की जांच की तो पता चला कि इसका ऑफिस गाज़ियाबाद के साहिबाबाद में है. यह संस्था भ्रष्टाचार और अपराध के विरुद्ध मुहिम चलाती है. साथ ही ये डिटेक्टिव और सिक्योरिटी सर्विस भी प्रोवाइड करती है. इसी वजह से इस संस्था का नाम क्राइम इंटेलीजेंस डिटेक्टिव है. इसके चीफ डायरेक्टर हैं अरविंद गिरी गोस्वामी।

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लेकिन गोस्वमी ने वायर हो रही इन पोस्ट पर से सारा सस्पेंस कल्यिर कर दिया उन्होंने अपने संस्थान का असली लेटर हेड जारी करते हुए स्पष्टीकरण दिया किया कि कुछ शरारती व्यक्ति उनकी संस्थान का लेटर हेड मोबाइल से कटिंग करके फर्जी खबर फैला रहे है ।
वीके न्यूज की पड़ताल में खबर ये पूरी तरह से फर्जी पाई गई लेकिन इसकों बनाने में पूरी तरह से ईमानदारी बरती गई है बनाने वाले का दिमाग देखिए सिंध हाईकोर्ट का ऑर्डर उठाया और और दिल्ली के एक संस्थान का लेटर हेड और दोनों को जोड़कर एक फर्जी खबर तैयार कर दी ।

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