भारत ने एशिया कप 2018 के फाइनल मुकाबले में बांगलादेश को तीन विकेट से हराकर सातवीं बार एशिया कप की ट्रॉफी अपने नाम कर ली है. साथ ही एशिया कप के इतिहास में भारत की टीम ऐसी पहली टीम बन गई जिसने सबसे ज्यादा यानि कि 7 बार खिताब अपने नाम किया है. लेकिन इस बार भारत और बांग्लादेश के फाइनल मुकाबले में मैच काफी रोमांचक देखने को मिला.

जनाब बांगलादेश की टीम तो पहले से मूड़ बनाकर के आई थी कि इस बार तो भारत को हराकर नागिन डांस जमकर करना है. लेकिन सहाब भारत की टीम ने भी कसम खा रखी थी कि चाहे कुछ भी हो जाए बेटे को बाप से ऊपर नहीं पहुंचने देंगें. फिर क्या था बाग्लादेश ने टॉस जीतकर पहले बेटिंग करना ठीक समझा. शुरु में कप्तान मशरेफी मुर्तजा ने लिटन दास के साथ मिराज को सलामी बल्लेबाज के तौर पर भेजा.

भारत और बांग्लादेश का फाइनल

लेकिन मिराज ने भी दास के साझेदार की भूमिका बखूबी निभाकर टीम को अच्छी शुरूआत दी. लिटन दास ने 117 गेंद में 121 रन बनाकर बांग्लादेश को अच्छी शुरूआत दी.  इसे देखकर ऐसा लगने लगा था कि बांग्लादेश बड़ा स्कोर बनायेगा. लेकिन लिटन दास के आउट होने के बाद बाग्लादेशी बल्लेबाज लय कायम नहीं रख सके. और गाड़ी पटरी से उतरना शुरु हो गई. आखिरकार नतीजा ये निकला कि बांग्लादेश के 10 विकेट 102 रन के भीतर गिर गए और पूरी पारी 48 वें ओवर की तीसरी बोल पर 222 रनों पर सिमट गई.

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अब सहाब बेटिंग के लिए के लिए भारत की टीम मैदान में उतरती है. और भारत की टीम शुरु में बांग्लादेश के 223 रनों वाले टारगेट को पूड़ी का पुआ समझ बैठती है. ऐसा क्यों हुआ वो आपके भारत की बेंटिग के बारे में जानने की जरुरत है. दरअसल भारत के ओपनिंग बल्लेबाज कप्तान रोहित शर्मा 55 गेंदों में 48 रन बनाकर आउट हो गए. और बाद में इंडिया की तरफ से सबसे बड़ा स्कोर बनाने वाले भी साबित हुए.  जिसमें इन्होनें तीन चौके और तीन ही छक्के लगाए.

शिखर धवन भी 15 रन बनाकर पवेलियन लौट गए. और यहीं से ही इंडिया की टीम गडंबडाने शुरु हो गई. फिर अंबाती रायुडू खेलने आए. सिर्फ 2 रन बनाकर ही इन्होने पवेलियन में वापसी कर ली. बाद में दिनेश कार्तिक ने 37 और महेंद्र सिंह धोनी ने 36 रन बनाए. भारत का स्कोर 160 रन था जब महेंद्र सिंह धौनी 36 रन बनाकर पवेलियन लौटे.  इसके बाद केदार जाधव भी 37 रन बनाकर रिटायर्ड हर्ट हो गए. उनके पैर की मांसपेशियों में खिंचाव आ गया था। फिर केदार की जगह भुवनेश्वर कुमार मैदान पर आए.

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भारत को अब जीत के लिए 60 बॉल्स पर 51 रन चाहिए.  लेकिन दर्शक सोचने लगे कि भुवनेश्वर तो केवल 4-6 रन बनाकर ही पवेलियन लौट आयेगे. उनका तर्क भी ठीक था, क्यो कि बोलर इतने रन कैसे बना सकता है. भारतीय दर्शकों उदास नजर आ रहे थे और मैच करकांटे का चल रहा था. और उस वक्त रवींद्र जडेजा और भुवनेश्वर कुमार मैदान में थे. लेकिन जडेजा की तरफ से कोई खास रेसपोन्स नही आ रहा था.

इसी बीच भुवनेश्वर कुमार ने मैदान के चारों ओर देखा और अगली गेंद छक्के लिए टांग दी. फिर क्या था यहीं से मैंच में जान गई. अगले ओवर में एक बार फिर से चौका ज़ड दिया. और भुवनेश्वर दर्शकों के सामने साबित हुए. इसी बीच रवींद्र जडेजा 23 रन बनाकर आउट हो गए. अब भारत को जीत दिलाने की जिम्मेदारी चोटिल केदार जाधव के कंधों पर थी. फिर केदार जाधव ने वापसी की और केदार जाधव और भुवनेश्वर मैदान पर खेल रहे थे. तभी भुवनेश्वर कुमार भी 21 रन बनाकर पवेलियन लौट गए.

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केदार जाधव के साथ कुलदीप यादव उनके दूसरे छोर पर उनका साथ देने आए. और अब भारत को आखिरी ओवर में जीत के लिए 6 रन की जरूरत थी। इस ओवर की पहली गेंद पर कुलदीप यादव ने एक और दूसरी पर केदार जाधव ने एक रन लिया. तीसरी गेंद पर कुलदीप ने दो रन लिये लेकिन अगली गेंद पर रन नहीं बन सका. यहीं से भारतीय दर्शकों की सांस थम गई.

इसके बाद पांचवीं और छठी गेंद पर एक एक रन लेकर कुलदीप और केदार ने भारत को बांग्लादेशी टीम पर जीत दिलाई. बता दें कि सोशल मीडिया पर भी फैन्स ने केदार जाधव को इस मैच का असली हीरो बताया. पैर में खिंचाव और हाथ ही उंगली में चोट के बावजूद भी केदार जाधव ने बल्लेबाजी और गेंदबाजी ने सबका दिल जीत लिया.

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