किक्रेट टीम में विकेट लेना हर गेंदबाज की चाह होती हैं. साथ ही क्रिकेट में गेंदबाज की बड़ी भूमिका भी होती है. क्‍योंकि अगर कोई खिलाड़ी अपनी विस्‍फोटक बल्‍लेबाजी से रनों का रिकॉर्ड बना देता है, तो वहीं खतरनाक गेंदबाज अपनी गेंदबाजी से उस बड़े रिकॉर्ड को बनने से रोकने में भी माहिर होता है. आज हम बात करेंगे ऐसे ही एक गेंदबाज की जिनके लिए विकेट लेना उनका शौक नहीं बल्कि उनकी मज़बूरी थी.

दरअसल उस गेंदबाज का नाम है पप्पू राय, जो बिहार का रहने वाला है. जिसने अपना पेट भरने के लिए क्रिकेट खेलना शुरू किया था. मेहनत करने के साथ-साथ मजबूरी की ठोकरें खाते हुए 23 वर्षीय पप्पू राय ऐसे मुकाम पर पहुंच गए, कि उनकी गेंदबाजी के चर्चे दूर दूर तक होने लगे.

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और बेहतरीन प्रदर्शन के चलते उन्हें अजिंक्य रहाणे की अगुवाई वाली टीम में देवधर ट्रॉफी के लिये चुना गया. जो गेंदबाज गेंदबाजी के समय ये तय करता हो कि गेंदबाजी के चलते उसको खाना मिलेगा या नहीं..तो सोचिए उसके लिए देवधर ट्रॉफी में जगह पाना कैसा महसूस हुआ होगा. अब आपको इस गेंदबाज की दर्दनाक कहानी के बारें में बताते है.

बता दें कि पप्पू के माता-पिता बिहार के सारण जिले में छपरा से 41 किमी दूर खजूरी गांव के रहने वाले थे. वे रोजी-रोटी के लिए कोलकाता आए थे. उनके पिता ट्रक ड्राइवर थे और दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया था. और मां भी लंबी बीमारी के बाद चल बसीं. पप्पू ने जब ‘मम्मी-पापा’ कहना भी शुरू नहीं किया था तभी उनके माता-पिता का साया सिर से उठ गया था. और तभी से उनके ऊपर दुख का पहाड़ टूट पड़ा.

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पेट भरने के लिए न जाने कितनी मुश्किलों को सामना किया, और बाद में इन्होनें अपना पेट भरने के लिए गेंदबाजी सीख ली और उसे ही फोकस किया. मैच में पप्पू के हिसाब से हर विकेट का मतलब होता था कि उन्हें दोपहर और रात का खाना मिलेगा.

पप्पू ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि जिसकी टीम में मैं खेलता था वो लोग बोलते थे कि अच्छी गेंद डालेगा तो ही खाना खिलाएंगे. उन्होने आगे बताया जिस टीम की तरफ से मैं खेलता था वो लोग हर विकेट का दस रुपये देते थे.

बता दें कि पप्पू ने 2015 में ओडिशा अंडर-15 टीम में जगह मिली थी. और तीन साल बाद पप्पू सीनियर टीम में पहुंच गए और उन्होंने ओडिशा की तरफ से लिस्ट-ए के आठ मैचों में 14 विकेट लिए. साथ ही इस खबर से ये भी शिक्षा मिलती है कि परिस्थितियां कितनी भी विपरीत हो, हौसले हमेशा बुलंद रहने चाहिए.

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