क्रिकेट की दुनिया में कुछ सालों में बहुत से बदलाव आए हैं, जिसकी वजह से बल्लेबाजों को रन बनाने में मदद मिलती है और गेंदबाजों के लिए गेम और टफ होता जा रहा है। अक्सर आपने देखा होगा बहुत से बल्लेबाज क्रिकेट के अलग-अलग सामान इस्तेमाल करते हैं, IPL  में मैथ्यू हेडन ने मंगूस बैट का पहली बार इस्तेमाल किया था। ये देखने में बहुत अट्रैक्टिव और कूल लगता है, साथ ही इससे बल्लेबाजों को इसके लॉंग हैंडल की वजह से लम्बे-लम्बे सिक्स लगाने में भी मदद भी मिलती है। कई बार तो अंतरराष्ट्रीय लीग्ज़ में बैट्समैन अलग रंग के क्रिकेट बैट्स का इस्तेमाल करते हुए देखे गए।

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कुछ इस तरह का था हैडन का बल्ला

लेकिन इस अलग तरह के बैट्स इस्तेमाल करने पर प्लेयर्स को कॉन्ट्रोवर्सी का भी सामना करना पड़ जाता है। कुछ दिन पहले ही अंपायर्स ने वैस्टइंडीज़ के ऑल राउंडर प्लेयर रसल को बीग बैश लीग में काले रंग का बैट इस्तेमाल करने से रोक दिया था। देखिए और जानिए कैसा था रसल का बैट और क्यों लगी इस बल्ले पर रोक।

इसलिए बैन हुआ था काला बैट

क्रिकेट को इंट्रेस्टिंग बनाने के लिए बहुत से बदलाव हो रहे हैं, कभी बॉल का रंग लाल से गुलाबी करने की बात सामने आती है, तो कभी ऐसे कलरफुल बल्ले सामने आते हैं।

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ऐसे होते हैं कलर्ड बैट

दरअसल बिग बैश लीग में सिड्नी थन्डर के ऑलराउंडर आन्द्रे रसल ने एक मैच काले रंग के बैट से खेला था, जिसकी वजह से लीग में इस्तेमाल हो रही कुकाबूरा की गेंद पर बैट के काले पेंट का रंग छूट रहा था और इसी वजह से अंपायर्स की शिकायत पर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने कलर्ड बैट को बैन करने का फैसला लिया था।

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