आपने कई बार देखा होगा बड़ी-बड़ी टीमों के बल्लेबाज इंडिया में आकर भीगी बिल्ली बन जाते हैं। विदेशों में जिन टीमों ने शानदार खेल दिखाया होता है उनको इंडिया आते ही सांप सूंघ जाता है। जिन बल्लेबाजों के नाम बड़े-बड़े रिकॉर्डस हैं, वे बल्लेबाज भी भारत आकर  स्पिन गेंदबाजों के आसानी से शिकार हो जाते हैं। और तो और जिन गेदबाजों का नाम क्रिकेट की दुनिया में किसी ने सुना भी नहीं होता, इंडिया में एक मैच खेलते ही वो हीरो बन जाते हैं। अब तो इस बात का इतना असर होने लगा है, कि जो भी टीम भारत आती है, वो ये सोचकर ही आती है, कि उसे यहां स्पिन बॉलिंग ही ज्यादा खेलने को मिलेगी। दुनिया के हर स्पिन बॉलर का सपना होता है भारत में आकर मैच खेलना….लेकिन क्यों ?

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ये है इसके पीछे की वजह

भारत में खेले जाने वाली SG Test बॉल

इसकी वजह भारत की जमीन या पिच नहीं है, इसकी असली वजह है भारत में यूज़ होने वाली गेंद। भारत में  जो गेंद इस्तेमाल होती है, वो है SG Test नाम की गेंद। अब आप सोच रहे होंगे कि इस गेंद में ऐसा क्या है जो स्पिन बॉलरों को मदद करता है ? तो आपको बता दें, कि बाकी गेंदों की सिलाई थोड़ी दबी हुई होती है, जबकि SG Test गेंद की खासियत ही इसकी उभरी हुई सिलाई है, जिसे अंग्रेजी में सीम कहते है। यही सीम स्पिन बॉलरों को गेंद ग्रिप करने में मदद करती है, जिसकी वजह से गेंद को ज्यादा घुमाव मिलता है और गेंद काफी स्पिन होती है।

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ऐसी होती है ड्यूक कंपनी की गेंद

वहीं ज्यादातर देशों में कुकाबुरा कंपनी की गेंद इस्तेमाल होती है, जिसकी सिलाई उभरी नहीं, दबी हुई होती है वहीं वेस्टइंडीज़ और इंग्लेड में क्रिकेट मैच के दौरान ड्यूक कंपनी की गेंद इस्तेमाल की जाती है। जबकि, भारत में SG Test नाम की गेंद यूज़ होती है।

ऐसी दिखती है कुकाबुरा की गेंद

 

 

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